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बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि

एक बेटी ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। मेरठ के इतिहास में बेटी द्वारा पिता की चिता को मुखाग्नि देने की यह पहली घटना बताई जा रही है।

दाह संस्कार में मृतक के परिचितों और रिश्तेदारों के साथ ही शहर के कई गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। मुख्य अभियंता पद से अवकाश प्राप्त आनंद बिहारी माथुर (77) की कोई संतान नहीं थी। इसलिए उन्होंने अपने ही एक रिश्तेदार की लड़की आनंदिता को गोद लिया था।

रविवार रात माथुर की किडनी फेल होने से मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु के बाद उनके रिश्तेदारों के समक्ष सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर उनकी चिता को मुखाग्नि कौन देगा।

उनकी इस समस्या का समाधान आनंदिता ने यह कहते हुए किया कि वह अपने पिता के लिये बेटी भी थी और बेटा भी इसलिए वह नहीं चाहती कि आखिरी समय में अपने पिता को बेटे की कमी का अहसास होने दे और अपने पिता की अंत्येष्टि की।

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