class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जीत है छोटी ,लेकिन आस है बड़ी

अगर कोर्ट ने अथॉरिटी बायलॉज को तलब लिया तो यमुना अथॉरिटी को लेने के देने पड़ सकते हैं। अथॉरिटी ने जमीन अधिग्रहण की पूर्ण कार्रवाई से पूर्व ही जमीनों को बेच दी और उसके एवज में करोड़ो रुपए लिए, जबकि अभी तक इस मालिकाना हक किसानों का ही है। यही नहीं अधिकांश अधिग्रहित भूमि निजी एजेंसी को दी जा रही है, जिसके विरोध में किसान हैं।


रिलायंस पावर प्रोजेक्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा। अनुमान है कि एक सप्ताह के अंदर करीब 5 से 10 हजार याचिकाएं यूपी सरकार व अथॉरिटी के खिलाफ हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में डाली जाएगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक निजी कंपनी के खिलाफ है, लेकिन किसानों का तर्क है अथॉरिटी भी एक कंपनी की तरह ही कार्य कर रही है।


किसानों के तर्क के अनुसार यूपी सरकार भूमि अधिग्रहण के बने नियमों का पालन नहीं करती। यही नहीं मुआवजा देने में आनाकानी की है। इसके अलावा आबादी नियमावली सहित सेटेलाइट सर्वे की बात अभी तक कागजों में है। तर्क के अनुसार ग्रेनो अथॉरिटी व यमुना अथॉरिटी एक भी नियम का पालन नहीं किया है।

धारा-6 व 9 के बगैर बना नक्शा: नियमानुसार धारा-4 की अधिसूचना के बाद धारा 6 व 9 होती है, जिसके बाद किसान को मुआवजा मिलता है और उस पर कोई प्लान या प्रोजेक्ट लाया जाता है। अथॉरिटी ने सेक्टर-18 व 20 का ड्रा करा लिया और नक्शों में प्लाटिंग भी कर ली, जबकि धारा-6 व 9 भी नहीं की गई। अथॉरिटी ने इसके एवज में बगैर मालिकाना हक के भूमि को 4700 रुपए में बेचा जो कानूनन गलत है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला का स्वागत है,हम लोग यूपी सरकार व अथॉरिटी के खिलाफ कोर्ट जाएंगे और इनके काले चिटठे खोलेगें। हम लोग एकजूट हो रहें है उसके बाद रणनीति बनाएगें। अनूमान है कि इस सप्ताह 5 हजार से अधिक किसान आपत्तियां दर्ज कर कोर्ट जाएंगे।
राकेश टिकैत
भारतीय किसान युनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता

किसानों की आपत्तियां: किसानो की मांग है कि मुआवजा हरियाणा राज्य की तुलना में कम है, जबकि उनकी जमीनों की कीमत बाजार में हमसे कम की है।
खास-खास
बगैर आबादी सर्वे के किया जाता है अधिग्रहण
समय पर अधिग्रहण के बाद नहीं मिलता मुआवजा
नियमानुसार कंपनियों के बाद के स्थानीय लोगों की भूमिका नहीं रहती
5 प्रतिशत के प्लाट भी नहीं दिए जाते
किसी भी भूमि को मनमर्जी तरीके से किया जाता है अधिग्रहित
यमुना एक्सप्रेस-वे एक नजर
ग्रेटर नोएडा से आगरा तक कुल दूरी 165 किलोमीटर
पांच जनपद की भूमि: गौतमबुद्धनगर, महामाया नगर, मथुरा, अलीगढ़ और आगरा
858 गांवो की भूमि का अधिग्रहण कर होगा विकास
अभी तक बने प्लान के तहत:
आवासीय योजना के लिए 2500 हैक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा
रोड के लिए 415 हैक्टेयर भूमि का
टोल प्लाजा व इंटर चेंज जोन के लिए: 125 हेक्टेयर
फामरूला वन रेस के लिए: 1000 हजार हेक्टेयर
लैंड व अन्य योजनाओं के लिए: 1000 हजार हेक्टेयर
दो अन्य कंपनियों के लिए 1000 हेक्टेयर
प्रभवित होगें: करीब 1 लाख किसान अधिग्रहण से होगें प्रभावित

फिलहाल यहां चल रहें है आंदोलन
कहां और क्यों चलाया जा रहा है आन्दोलन
1 सादोपुर, कैलाशपुर व देवला समेत आठ गांवों के किसान आबादियों को अधिग्रहण के दायरे में लिए जाने से खफा है।
2 हजरतपुर बोड़ाकी के किसान बगैर विश्वास में लिए धारा 6 की कार्रवाई से नाराज हैं।
3 रानौली, बढपुरा व धूम मानिकपुर के किसान बढी दरों पर मुआवजे का भुगतान करने के लिए सिमेंट फैक्ट्रियों के खिलाफ आन्दोलन छेड़े हुए हैं।
4 निलौनी मिर्जापुर समेत एक दजर्न गांवों के किसान यमुना अथॉरिटी के खिलाफ आए दिन पंचायतें कर रहे हैं। इन किसानों की मांगे नोएडा के समान मुआवजा और अन्य सुविधाऐं दिए जाने की हैं।
5 ईस्टर्न पैरिफिरल एक्सप्रेस वे के कुछ किसानों ने मुआवजा उठाना शुरू कर दिया है हालांकि अधिकांश अभी ग्रेटर नोएडा जैसी सुविधाओं के लिए मोर्चा खोले हुए हैं।
6 इटैड़ा हैबतपुर, सावेरी व चिपियाना के लोग अवैध कालोनियों के खिलाफ की जा रही अथॉरिटी की कार्रवाई से नाराज हैं।

एक्सप्रेस वे की हालत-हकीकत
 अधिकांश प्रोजेक्ट जेपी एसोसिएट्स ग्रुप बना रहा है।
 वर्ष 2003 में दिया गया था प्राजेक्ट, 2010 में पूरा करना था लेकिन सपा सरकार ने रोक लगा दी और अथॉरिटी व ग्रुप के बीच हुए समझौते की शर्तो पर जांच बैठा दी।
 ग्रुप को प्रोजेक्ट पूरा करने मे ढाई हजार करोड़ रुपये खर्च करने थे, बदले में अथॉरिटी मनचाही जगहों पर ग्रुप को देगी ढाई हजार हेक्टेयर जमीन
 अब यह प्रोजेक्ट दिसम्बर 2013 में होगा पूरा
 चार पाकेटों में ही एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। ग्रेटर नोएडा के गलगोटिया कालेज से दनकौर तक दो लेन तैयार भी हो गया है।
 एक्सप्रेस वे के किनारे जेपी ग्रुप एक हजार हेक्टेयर में फार्मूला वन कार रेसिंग ट्रैक बना रहा है, जिसका निर्माण शुरू हो चुका है।
 इसी प्रोजेक्ट में जेपी ग्रुप ने अपनी स्पोर्ट सिटी आवासीय योजना घोषित की है।
 एक्सप्रेस वे के किनारे अथॉरिटी ने 275 एकड़ की इंस्टीट्यूशनल स्कीम निकाल थी, जिसके सभी आठ प्लाट बेचे जा चुके हैं।
 यमुना की आवासीय योजना के सेक्टर 18 व 20 भी दनकौर से पांच किलोमीटर आगे एक्सप्रेस वे के किनारे पर हैं। अथॉरिटी ने हाल ही में करीब 21 हजार आवासीय प्लाट बेचे हैं।
 लॉजेस्टिक पार्क व नाईट सफारी प्राजेक्ट भी एक्सप्रेस वे के किनारे बनाए जाने हैं।
 एसडीजेड व एसईजेड समेत आगरा तक एक्सप्रेस वे के किनारे कई इंडस्ट्रीयल सेक्टर व टाउनशिप प्रस्तावित हैं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जीत है छोटी ,लेकिन आस है बड़ी