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विवि व डिग्री कालेजों के शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

प्रदेश भर के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों ने सोमवार को शहीद स्मारक के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। वह छठे वेतनमान के तहत एरियर भुगतान में की जा रही गड़बड़ी व अपनी अन्य मांगे पूरी न होने से खफा हैं।

शिक्षकों के प्रदर्शन के कारण शहीद स्मारक के सामने मुख्य मार्ग करीब तीन घण्टे तक जाम रहा। नारेबाजी करते हुए शिक्षकों का हुजूम विधान भवन की ओर बढ़ने लगे। प्रदर्शनकारी शिक्षकों को रोकने के लिए मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें बैरिकेटिंग लगाकर रोकने की कोशिश की। लेकिन शिक्षक पीछे हटने को तैयार नहीं थे।

एडीएम ने शिक्षकों से अपनी मांगों का ज्ञापन देने को कहा। लेकिन शिक्षक तैयार नहीं हुए। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वह आगे बढ़ने लगे। शिक्षकों के उग्र होते प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें तत्काल शासन के उच्चअधिकारियों से वार्ता करवाने का आश्वासन दिया गया।

एडीएम नगर पूर्वीअनिल पाठक ने इसकी जानकारी मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव शैलेष कृष्ण को स्थिति से अवगत करवाया। इसके बाद उन्होंने शिक्षकों के शिष्टमंडल को वार्ता के लिए पंचम तल बुलाया।

प्रमुख सचिव से वार्ता के लिए दस शिक्षक नेता गए। इसमें लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ. मौलीन्दु मिश्र व महामंत्री डॉ. मनोज पाण्डेय के अलावा लूटा के अध्यक्ष डॉ. अनिल शुक्ला उप्र आवासीय विश्वविद्यालय महासंघ के अध्यक्ष चितरंजन मिश्र व महामंत्री शोभनाथ त्रिपाठी,सचिव पुष्पेन्द्र मिश्र,फुपुक्टा के अध्यक्ष धनश्याम सिंह, प्रभारी महामंत्री जेएन शुक्ला आदि शामिल थे।

लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ. मौलीन्दु मिश्र ने बताया कि डिग्री व विश्वविद्यालय शिक्षकों को एक जनवरी 2006 से लेकर 30 नवम्बर 2008 तक छठे वेतनमान के तहत एरियर का भुगतान नहीं किया जा रहा है। शासन ने इसमें काल्पनिक शब्द जोड़कर इसे पेचीदा बना दिया है।

इसके अलावा मकान किराया भत्ता, नगर प्रतिकर भत्ता सहित तमाम अन्य विसंगतियां भी अभी दूर नहीं हुई हैं। वहीं शिक्षकों की सेवानिवृत्त आयु बढ़ाकर 65 वर्ष भी नहीं किया गया है।

फिलहाल मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने शिक्षकों को आश्वासन दिया है कि वह दो दिन में प्रमुख सचिव वित्त, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा और कैबिनेट सेक्रेट्री के साथ बैठक करेंगे और उनकी मांगों पर सहानूभूति पूर्वक विचार करेंगे। उन्होंने कहा किकोई न कोई हल अवश्य ढूंढ़ लिया जाएगा।

गुरूवार को वह अपने निर्णय की जानकारी शिक्षक नेताओं को दे देंगे। उच्चअधिकारी से आश्वासन मिलने के बाद शिक्षकों ने जाम हटा लिया। अब वह 6 जनवरी को चाक डाउन हड़ताल करेंगे।

कोई भी शिक्षक कक्षाएं नहीं पढ़ाएगा। अगर मांगे पूरी न हुईं तो वह परीक्षा कार्यो का बहिष्कार करेंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। 

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