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रमेश ने वार्ताकारों के लिए खीचीं लाल रेखाएं

रमेश ने वार्ताकारों के लिए खीचीं लाल रेखाएं

जलवायु परिवर्तन पर हो रही बातचीत के दूसरे अहम दौर में प्रवेश करने के साथ ही भारत ने रविवार को मसौदा संधि के उन बिंदुओं को खारिज कर दिया जिनमें सभी देशों से उत्सर्जन में कटौती, कटौती की शुरुआत के एक साल बाद रजामंदी और कटौती संबंधी कदमों को अंतरराष्ट्रीय छानबीन के दायरे में लाने की बात कही गई थी।

संधि के आधिकारिक मसौदे के गत शुक्रवार प्रसारित होने के साथ ही 194 देशों के बीच मतभेद साफ तौर पर सामने आए थे। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि वह मसौदे का इस्तेमाल समझौते की आगामी बातचीत के शुरुआती बिंदु के तौर पर करेंगे। बहरहाल, उन्होंने साफ कर दिया कि भारत अपने तीन मुख्य सिद्धांतों यानी उत्सर्जन में बाध्यकारी वैधानिक कटौती नहीं करने, शीर्ष उत्सजर्न वाला वर्ष नहीं बताने और घरेलू आर्थिक मदद वाली कटौती के संबंध में उठाए जाने वाले कदमों की अंतरराष्ट्रीय समीक्षा नहीं कराने के मुद्दे पर समझौता नहीं करेगा। रमेश ने कहा कि भारत इन तीन मूर्ति पर समझौता नहीं करेगा।

रमेश ने कहा कि वार्ता का नतीजा संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन संबंधी प्रारूप के भीतर, क्योटो प्रोटोकॉल के मुताबिक और बाली कार्य योजना के अनुपालन में होना चाहिए। रमेश ने कहा कि हमें 2010 में समझौता करना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक वक्तव्य का मूल पाठ 15 दिसंबर तक तैयार हो जाना चाहिए।

रमेश ने संकेत दिए कि 12 दिन की वार्ता के बाद राजनीतिक वक्तव्य जारी किया जाएगा, जिस दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने भारत सरकार की ओर से साफ तौर पर कहा है कि हमारे प्रधानमंत्री यहां मूल पाठ पर समझौते की बातचीत करने नहीं आ रहे हैं।

मसौदा संधि का अनुच्छेद तीन सभी पक्षों से 2050 तक उत्सर्जन में 50, 85 या 90 फीसदी की कटौती करने का आह्वान करता है। इसके बाद का अनुच्छेद मांग करता है कि सभी पक्ष जितना जल्द संभव हो सके शीर्ष उत्सर्जन के बारे में बताएं। अनुच्छेद आठ के तहत कटौती संबंधी बाध्यताओं की व्यापक समीक्षा का आह्वान किया गया है जिसके पहले दौर की शुरुआत 2016 से होगी।

रमेश ने कहा कि मैंने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि जहां तक भारत का सवाल है तो अनुच्छेद तीन, चार और आठ लाल रेखाएं हैं। हमें न सिर्फ मसौदे के निर्माण को लेकर समस्या है, बल्कि उसके विचार से भी समस्या है। उन्होंने कहा कि भारत को इन मसौदों के कुछ प्रावधानों पर समस्या है, लेकिन वह इनका इस्तेमाल मसौदा विकसित करने के बुनियादी मूल पाठ के रूप में करने को तैयार है।

मंत्री ने कहा कि ऐसे महज दो ही दस्तावेज हैं जो तर्कसंगत हैं और जिन्हें दो समितियों ने तैयार किया है। इन मसौदों में ऐसी कई चीजें हैं जिनसे हमें समस्या है। उन्होंने यह भी कहा कि इन मसौदों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें सभी सरकारों ने पेश किया है, इसे पारदर्शी तरीके से तैयार किया गया है और इसमें टू ट्रेक तरीका अपनाया गया है।

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