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लखनऊ के डिब्बों का दिल्ली में बसेरा

रेलमंत्री ममता बनर्जी की उम्मीदों पर उनके ही अधिकारी पानी फेर रहे हैं। उत्तर रेलवे की जिन ट्रेनों में तीन महीने पहले तक अतिरिक्त डिब्बे लगाकर करोड़ों की कमाई की गई थी वही अब उन्हीं ट्रेनों की आमदनी कम होती जा रही है।

उत्तर रेलवे के नए उप मुख्य परिचालन प्रबंधक (कोचिंग) ने ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने के अभियान पर पानी फेर दिया है। उनके इस रवैये से जहाँ अफसर परेशान हैं वहीं इसका खामियाजा अब यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली एसी स्पेशल में एक हफ्ते से एक फस्र्ट एसी कोच कम चल रहा है लेकिन मुख्यालय ने यह कमी दूर करने की जहमत नहीं उठाई। वाराणसी इंटरसिटी हफ्ते भर से बगैर एसी चेयरकार के चल रही है परन्तु डिप्टी सीओएम संजय गोयल ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी। लखनऊ के ज्यादातर डिब्बे दिल्ली मंगाकर उन्होंने अतिरिक्त कोच लगाने के एकाधिकार बना लिया है।

मंडलों से जब परिचालन व वाणिज्य अधिकारी उनके अतिरिक्त कोच लगाने की माँग करते हैं तो वह उनके प्रस्ताव को नियम कानून में उलझाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। राजधानी के सैकड़ों यात्रियों को अब अतिरिक्त डिब्बों की सुविधा मिलनी मुश्किल हो रही है।

पहले जहाँ लखनऊ से रोजाना 10 से लेकर 15 अतिरिक्त डिब्बे आसानी से लगाए जाते थी वहीं श्री गोयल ने कोच लगाने की अनुमति देने में लगातार अड़ंगेबाजी कर रहे है। लखनऊ के ज्यादातर अतिरिक्त डिब्बे दिल्ली चले जाने से अब अधिकारी चाहकर भी ट्रेनों में अपने स्तर से कोच नीं लगा पा रहे हैं।

इससे इन ट्रेनों का राजस्व भी घटने लगा है। इसके अलावा यात्रियों को भी जरूरत के मुताबिक शायिकाएँ नहीं मिल पा रही हैं। इसके पहले पूर्व डिप्टी सीओएम विकास चौबे ने सभी मंडलों में अतिरिक्त डिब्बे लगवाने का रिकार्ड तोड़ दिया था।

उनके इस काम की  सदस्य यातायात श्री प्रकाश ने भी सराहना की थी। रेल राजस्व में भी खासी बढ़ोत्तरी हुई थी। उत्तर रेलवे के सीपीआरओ अनंत स्वरूप ने कहा कि इस मामले में वह डिप्टी सीओएम से बात करेंगे।

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