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सिमरिया विधानसभा क्षेत्र हैं पांच फीसदी किसान, पर नेताजी नहीं देते ध्यान

सिमरिया विधानसभा क्षेत्र के 95 फीसदी बाशिदों का मुख्य पेशा कृषि है। जिस विधानसभा क्षेत्र की इतनी बड़ी आबादी खेती से जुड़ा हो, उनके विकास के लिए किसी नेता ने गंभीरता से नहीं सोचा। किसानों को तो बस इस बात से भरमाया जाता है कि उन्हें कुआं मिलेगा। छोटे-छोटे तालाब बनवाए जाएंगे।

किसी नेता ने यह आश्वासन नहीं दिया कि किसानो के उत्पादन की विपणन की व्यवस्था की जाएगी। सिमरिया विधानसभा क्षेत्र टमाटर और आलू के उत्पादन के लिए जाना जाता है। शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज) नहीं रहने से किसानों को औने-पौने दाम में अपने उत्पादन बेचने पड़ते हैं।

शीतगृह निर्माण के लिए कई बार हुए आंदोलन से भी नेताओं की आंखें नहीं खुल पायी। सिमरिया विधानसभा क्षेत्र के किसानों को इस बात से ज्यादा पीड़ा होती है कि जहां के माटी में उपजने वाले टमाटर को कोलकाता ओर बंग्लादेश में हाथो-हाथ लिया जाता है वहां उसके भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं है।

कृषि विकास के लिए क्षेत्र में कई चेकडैम बने, पर वैसे जगहों पर, जहां खेती लायक नहीं के बराबर है। कुआं, तालाब और चेकडैम निर्माण के लिए स्थल चयन के दौरान किसानों की राय नहीं ली जाती। अफसर और इंजीनियरों के करीब रहने वाले लोग ही यह तय करते हैं कि कहां काम होगा।

किसानों को इस बात से भी अफसोस होता है कि उनके प्रखंडों में सरकारी धान क्रय केंद्र नहीं है। धान बेचने के लिए उन्हें हजारीबाग जिले के बड़कागांव का सफर तय करना पड़ता है।

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  • Web Title:सिमरिया विधानसभा क्षेत्र हैं पांच फीसदी किसान