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छात्रों ने डेढ़ एकड़ मैदान को किया हरा-भरा

डेढ़ एकड़ का एक ऊबड़-खाबड़ मैदान कंटीली झाड़ियों से अटा पड़ा हुआ था, इसे समतल करने के लिए न तो बुल्डोजर की जरूरत आन पड़ी और न ही किसी सरकारी मशीनरी को कवायद करनी पड़ी। यह काम किया डेढ़ हजार छात्र-छात्रओं के तीन हजार हाथों ने। और इसके बावजूद उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार का खलल नहीं पड़ा।

अपनी इस कामयाबी पर छात्रों ने किसी प्रकार की ढोल-नगाड़ा भी नहीं बजाया। बल्कि उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज उसी मैदान पर वे ही बिना बाधा के एक कोने से दूसरे कोने कुलाचे भर रहे हैं। डेढ़ हजार छात्रों ने ऐसा कुछ कर दिखाया जिसकी कल्पना शायद किसी ने भी नहीं की थी।

जी हां लगभग डेढ़ एकड़ का ऊबड़-खाबड़ मैदान, जिस पर जंगली व कटीली झाड़ियों की भरमार थी। लेकिन छात्रों ने मिलकर इस ऊबड़-खाबड़ मैदान को न केवल समतल बना डाला बल्कि मैदान के एक छोर पर छायादार लगभग चार सौ पौधे भी रोप दिए। इतना ही नहीं इन रोपे गए पौधों को वे नियमिततौर पर उसकी देखभाल भी करते हैं। और अब इस मैदान पर सभी प्रकार के खेल होते हैं। यह कारनामा किया है राजकीय इंटर कॉलेज के 1560 छात्र-छात्रओं ने।

ऐसा भी नहीं है कि इस काम के कारण उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा आई हो। कारण कि मैदान की साफ-सफाई का काम वे स्कूल शुरू होने के पहले करते थे या छुट्टी होने के बाद। राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवेश करते ही आपको छात्रों की मेहनत दिखाई पड़ने लगती है।

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