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आर्थिक संकट के चलते सिंचाई विभाग में राज्य स्तरीय सारी योजनाओं का काम ठप

सूबे में फैले सभी निरीक्षण गृहों की मरम्मत का काम दो साल से चल रहा था, 23 करोड़ खर्च हुए और अब काम ठप हो गया है। आर्थिक संकट के चलते राज्य सरकार के पास अब इस काम के लिए और पचास करोड़ रूपए नहीं हैं।

इसी तरह परिकल्प नगर उजाड़े जाने के बाद वहाँ रह रहे लोगों के पुनर्वास के लिए तेलीबाग में नहर के किनारे 60 करोड़ की लागत से कॉलोनी का निर्माण शुरू हुआ था। इस योजना पर 20 करोड़ खर्च भी हुए, उसके बाद काम रोक दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार इन दिनों सिंचाई विभाग में राज्य सरकार की योजनाओं का कमोबेश यही हाल है। प्रदेश सरकार ने साफ कह दिया है कि उनके पास पैसा नहीं है इसलिए विश्व बैंक और केन्द्र सरकार द्वारा अनुदानित योजनाओं पर ही काम करवाया जाए।

यही नहीं अगले वित्तीय वर्ष 2010-11 के लिए वार्षिक योजना में भी ऐसी ही योजनाएं शामिल करने को कहा गया है जिनमें केन्द्र सरकार या नाबार्ड से पैसा मिलता है। क्योंकि राज्य सरकार अपनी योजनाओं के लिए अगले वित्तीय वर्ष में भी माँग के मुताबिक धन देने की स्थिति में नहीं हैं।

प्रदेश सरकार का खजाना खाली होने की वजह से सिंचाई से सम्बंधित जो योजनाएं पहले से चल रही थीं,  महकमे के नियोजन अधिकारियों ने उन योजनाओं से भी अब  हाथ खींच लिया है। इनमें लाइनिंग, नहर प्रणाली के पुनरूद्वार, सड़क निर्माण, नहर की पटरियों को पक्का करने और नहरों के आसपास किसानों की ली गई जमीन के एवज में दिए जाने वाले भू-प्रतिकर के 100 करोड़ के बकाए भुगतान आदि के काम शामिल हैं।

इस बाबत सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता परिकल्प एवं नियोजन सबगान अहमद ने भी कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं में काम इसलिए ठप है क्योंकि आवश्यक्तानुसार धन नहीं मिल रहा है। अब वही योजनाएं चल रही हैं जो केन्द्र सरकार या नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित हैं।

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  • Web Title:सिंचाई विभाग में राज्य स्तरीय सारी योजनाओं का काम ठप