class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मान न मान

कहावत बेशक खालिस हिंदुस्तानी है, पर ऐसे मेहमान तो अमेरिका तक में होते हैं। अमेरिका तो बेशक किसी भी मुल्क में जाकर ठसके से यह कह सकता है कि मान न मान मैं तेरा मेहमान। दरोगा से यह कहने की हिम्मत कौन करे कि हुजूर, हमने तो आप को बुलाया नहीं। लोगों ने ओबामा साहब से बड़ी उम्मीद लगा रखी है कि शायद वे यह खराब आदत छुड़वा दें। पर आदत तो जाते-जाते जाती है। पता नहीं जाती भी है या नहीं। कहावत यह भी है कि चोर चोरी से जाए, हेराफेरी से न जाए।

खैर, अमेरिका तो किसी भी मुल्क में जाकर यह कह सकता है पर अमेरिका का मेहमान कोई ऐसे ही नहीं बन सकता। वो तो लत्ते उतरवा लेते हैं। और अमेरिकी राष्ट्रपति का मेहमान बनने में तो यह ठसका बिल्कुल भी नहीं चलता। यह ठसका हमारे यहीं नहीं चला था, जब अमरसिंह पिछली यूपीए सरकार के गठन के समय ऐसे ही उनके डिनर में पहुंच गए थे। उन्होंने लाख सफाई दी कि वे ऐसे नहीं पहुंचे थे, उन्हें तो कामरेड सुरजीत लेकर गए थे। पर सब उन्हें गेटक्रेशर ही कहते रहे। यह दर्द अपने दिल में लिए अमरसिंह चार साल तक डोलते रहे। पर कोई सुननेवाला तक नहीं था। लेकिन फिर पांचवें साल उन्हीं अमरसिंह ने उस यूपीए सरकार को बचाया, जिसके कारण उन्हें बेइज्जत होना पड़ा था। हालांकि अब वे यह दर्द लिए डोल रहे हैं कि उन्होंने क्यों बचाई वह सरकार।

पर जब अमेरिका के राष्ट्रपति की पार्टी में ऐसे मेहमान पहुंच गए तो हमारे यहां की पार्टियों की तो बात ही क्या करनी? हमारे यहां तो शादी-ब्याह में बेटीवाला डरता रहता है कि कहीं बेटेवाले की तरफ से न हों और बेटेवाले सोचते रहते हैं कि होगा यार कोई, खर्चा हमारा थोड़े ही हो रहा है। और अमरसिंह बनने का मौका तो हर किसी को मिलता नहीं। पर यह तो अमेरिका में भी हो गया। कहते हैं कि जिस व्हाइट हाऊस में परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहीं सलाही दंपत्ति पार्टी चर गए। चर ही नहीं गए मेजबान ओबामा और मेहमान मनमोहन सिंह के साथ फोटो भी खिंचवा गए, उन्हें फेसबुक पर लगा भी दिया। लोगों को पता तो इसी से चला। हमारे यहां तो चलो सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को हमेशा ही अपनी खामियों के बारे में कुछ न कुछ सुनना पड़ा है। पर भैया, सलाही दंपत्ति तो एफबीआई और सीआइए तक को चकमा देकर पार्टी छक गए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मान न मान