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रानी छतरी के जीण्रेद्धार का काम आज से शुरू

राष्ट्रमंडल खेलों से पहले ऐतिहासिक रानी की छतरी की तस्वीर बदलने का कार्य शनिवार से शुरू होगा। मुख्य संसदीय सचिव इसका उद्घाटन करेंगी। काफी सालों से जीर्ण हालत में पड़ी इस छतरी की मरम्मत को बल्लभगढ़ ब्यूटीफिकेशन एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (बीबीडीए) और स्वयं सेवी संस्था इनटेक अंजाम देगी।


तीन चरणों में इस छतरी का सुधारिकरण और सौंदर्यकरण कार्य किया जाएगा। शनिवार से इसके पहले चरण का काम शुरू होगा। इसमें छतरी की पुराना स्वरूप दिया जाएगा। ताकि छतरी पहले जैसी दिखे। डिवेलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन फॉर नेचर एंड हैरिटेज (द्रोनाह) की डॉ. शिखा जैन इसके डिजाइन तैयार करेंगी।
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हैरिटेज कॉरिडोर बनेगा
इनटेक ने बीबीडीए को राजा नाहर सिंह महल और रानी की छतरी के बीच हैरिटेज कोरिडोर बनाने का प्रस्ताव इस प्रोजेक्ट में जोड़ा है। इसको तीसरे फेज के कार्य के तहत रखा गया है।
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रानी की छतरी के जीर्णोद्धार की योजना का खाका
पहले फेज में होने वाले काम व खर्च
- छतरी के आसपास सें अवैध कब्जे हटाए जाएंगे
- एम्स की बच्चों की ओपीडी को शिफ्ट करनी होगी
- क्षेत्र की सफाई (खर्च -दो लाख रुपये)
- टैंक पर होने वाला काम (चार लाख रुपये)
- छतरी को नया रूप देने पर (11 लाख रुपये )
दूसरे फेज में होने वाला काम व खर्च
- वॉटर बॉडी का निर्माण
- पार्किग एवं रोड ले आउट (खर्च- 20 लाख रुपये)
- क्लीनिक साइट सहित लाइट, बैंच, रेनवाटर हारवेस्टिंग-
(खर्च 37.5 लाख रुपये)
- स्टॉल, क्राफट बाजार जिसमें 8 बड़ी व एक छोटी -(खर्च 15 लाख रुपये)
- एम्पीथियेटर साउंड एंड लाइट शो
- छतरी की लाइट एंड म्यूजियम
तीसरा फेज क कार्य
- गार्डन तैयार करना
- हैरिटेज शॉप बनाना
- लैंड स्केपिंग करना
- फाउंटेन लगाने का कार्य
- कॉरिडोर बनाना
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यहां से होगी फंड की व्यवस्था
इसको टूरिस्ट प्लेस बनाने के लिए बड़ी कीमत चुकानी होगी। इसके लिए फंड की व्यवस्था इनटेक और बल्लभगढ़ डिवेलपमेंट अथॉरिटी मिलकर करेंगे। इनटेक के संयोजक आनंद मेहता ने बताया कि छतरी के सौंदर्यकरण के लिए फंड मुख्यमंत्री कोष, बीबीडीए, जवाहरलाल नेहरू अर्बन रिनुअल मिशन (जेएनयूआरएम) और उद्योगपतियों से जुटाया जाएगा।
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रानी की छतरी का इतिहास
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सूली पर चढ़ने वाले राजा नाहर सिंह की पत्नी के लिए  ‘रानी की छतरी’ का निर्माण किया गया था। इतिहासकार इसे 150 साल पुराना मानते हैं। पहले इसमें रानी के नहाने के लिए कुंड था। अब यह खंडहर में तब्दील हो चुका है। इसी छतरी के एक हिस्से में 31 सालों से एम्स की बल्लभगढ़ शाखा के बच्चों की ओपीडी चल रही है।

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