class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अब मैला ढोना छोड़ बल्कि सब्जी बेचेगी राजकुमारी

पटना की राजकुमारी देवी को अब घर-घर जाकर शौचालयों की सफाई नहीं करनी पड़ेगी और न ही कलवतिया को सिर पर मैला ढोना होगा। ये और इन जैसी सैंकड़ों महिलाएं अब सरकारी ऋण की सहायता से खुद का उद्यम शुरु करेंगी।

गुरूवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मैला ढोने वालों और उनके आश्रितों के पुनर्वास के लिए आवंटित ऋण ने इन महिलाओं का सपना साकार कर दिया है।

पटना के ही मुसहरी टोला निवासी राजकुमारी बताती हैं कि लोगों के घरों में जाकर शौचालयों की सफाई करना उनकी मजबूरी थी। पेट के लिए ही वह इस तरह के काम करती थीं। अब वह सब्जी का दुकान खोलकर अपने परिवार का पेट भरेगी।

इधर, काठपुल मंदिरी इलाके की रहने वाली कलवतिया भी इस ऋण का उपयोग किसी रोजगारपरक कार्य में लगाना चाहती है। उसने आईएएनएस को बताया कि वह अब मैला नहीं ढोएगी। यही कहानी बुजुर्ग कामेश्वर राम की भी है।  उन्होंने कहा, ''मेरे जीवन की शुरुआत मैला ढोने से हुई थी। मुझे डर था कि मौत भी इसी के साथ होगी लेकिन  अब जीवन के अंतिम पड़ाव में मैं फल और सब्जी की दुकान शुरू कर इज्जत की जिंदगी व्यतीत करूंगा। ''

उल्लेखनीय है कि गुरूवार को मुख्यमंत्री ने मैला ढोने वालों एवं उनके आश्रितों के पुनर्वास के लिए के 4,515 लोगों के बीच 3०-3० हजार रुपये की राशि का चेक आवंटित किया था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अब मैला ढोना छोड़ बल्कि सब्जी बेचेगी राजकुमारी