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शहर के डाक्टरों में स्वाइन फ्लू को लेकर खौफ

स्वाइन फ्लू को लेकर शहर की आम जनता या फिर स्कूल प्रबंधन ही नहीं इस बीमारी का इलाज करने वाले सबसे ज्यादा खौफजदा है। स्वास्थ्य विभाग की माने तो शहर के 50 से अधिक डाक्टर अभी तक कंट्रोल रूम से दवा ले जा चुके हैं। इसके साथ ही अपने अन्य साथियों के लिए भी उन्होंने दवा हासिल की है। वहीं आईएमए ने भी चिकित्सकों को इस बीमारी से सचेत रहने का आवाहन किया है।


जिले में किसी भी अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आसोलेटिड वार्ड नहीं है। हिंडन पार क्षेत्र के एक प्राइवेट अस्पताल में आज इसकी व्यवस्था की गई है। लेकिन बाकी किसी भी बड़े अस्पताल में इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। आईएमएक के पूर्व अध्यक्ष डा. राकेश बंसल की माने तो चिकित्सक किसी भी मरीज की जांच करने से इंकार नहीं कर सकती। वहीं कोई बी अस्पताल मरीज को भर्ती करने से बी इंकार नहीं कर सकता। भर्ती होने के बाद ही मरीज की जांच की जाती है। यदि मरीज को स्वाइन फ्लू है तो जब तक उसकी पुष्टि होती है तब तक वह अपने आसपासे मौजूद लोगों को प्रभावित कर देते हैं। इस स्थिति में सबसे पहले डाक्टर ही आते हैं। ऐसे में आईएमए की तरफ से सभी डाक्टरों को सावधान रहने के निर्देश दिए हैं।


शहर के यशोदा अस्पताल में अब तक कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। इतना ही नहीं इस अस्पताल की एक महिला चिकित्सक भी मरीजों के संपर्क में रहने के करण प्रभावित हो चुकी है। अस्पताल में मरीजों की जांच करने जाने वाले डाक्टरों में खौफ बना हुआ है। इसके लिए डाक्टर लगातार जिला अस्पताल से टेमीफ्लू दवा ले रहे हैं। कई चिकित्सकों ने तो अपने लिए पहले ही दवा स्टोर कर ली है। शहर के एक प्रतिष्ठित चिकित्सक के मुताबिक अधिकतर डाक्टरों के पास टेमीफ्लू दवा जेब में हैं। जरा सी दिक्कत महसूस होने पर वह दवा लेने के लिए तैयार है।

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