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शतरंज को मिले ओलंपिक खेल का दर्जा :आनंद

शतरंज को मिले ओलंपिक खेल का दर्जा :आनंद

विश्व शतरंज में कई कीर्तिमान अपने नाम कर चुके विश्वनाथन आनंद के लिये रिकार्ड या उपलब्धियां अब अधिक मायने नहीं रखते और ना ही क्रिकेटरों की तरह हाइप नहीं मिलने का उन्हें कोई मलाल है लेकिन शतरंज के इस बादशाह की एक ख्वाहिश है कि इस खेल को ओलंपिक में शामिल किया जाये।
  
 तीन प्रारूपों (नाकआउट, मैच और टूर्नामेंट) में विश्व चैम्पियन बने दुनिया के पहले खिलाड़ी आनंद ने अपने जन्मदिन से पूर्व दिए इंटरव्यू में कहा कि जब आप अपनी उपलब्धियों को गिनने लगे तो कभी ना कभी गिनती खत्म हो ही जायेगी। पिछले पांच साल में शतरंज इतना प्रतिस्पर्धी हो गया है कि अगले मैच पर ही पूरा ध्यान लगाना पड़ता है। रिकार्ड और उपलब्धियों से संतोष मिलता है लेकिन असली खुशी जीत पर ही हासिल होती है।
     
खेलरत्न पाने वाले इस पहले खिलाड़ी को इस बात का कोई मलाल नहीं कि क्रिकेटरों की तरह उनके रिकार्ड या उपलब्धियों का खुमार लोगों के सिर चढकर नहीं बोलता।
    
उन्होंने कहा कि मुझे कोई शिकायत नहीं है। शतरंज को जितनी तवज्जो मिल रही है। मैं उससे खुश हूं। शतरंज को ओलंपिक खेल का दर्जा दिये जाने की मांग के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में आईओसी और फिडे को फैसला लेना है। लेकिन मेरी निजी राय यही है कि यदि इसे ओलंपिक में शामिल किया जाता है तो बहुत अच्छा होगा।

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