class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मेडिकल इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्धी बनना सिखाएगा मेडीफेस्ट

सरकार के ढुलमुल रवैये के चलते भारत में मेडिकल इंडस्ट्री को वह मुकाम नहीं मिल पाया है जितना उसे मिलना चाहिए था। अभी भी भारत में 80 फीसदी मेडिकल इक्विपमेंट बाहर से आयात किए जाते हैं। इसका प्रमुख कारण सरकार की मेडिकल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरिंग पर कोई स्पष्ट नीति न होना है। इन्हीं समस्याओं को लेकर तथा भारतीय मेडिकल इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रगति मैदान में 11 दिसंबर से 13 दिसंबर तक मेडीफेस्ट 2009 का आयोजन किया जा रहा है।


हिन्दुस्तान से खास बातचीत में मेडीफेस्ट के मुख्य आयोजक रोहित मदान ने बताया कि हम चाहते हैं कि हमारे मैन्यूफैक्चर्स को वह मुकाम मिले जिसके वे असली हकदार हैं। इस फेस्ट के माध्यम न सिर्फ हम नर्सो को इंफेक्शन से बचने के लिए ट्रेंड करेंगे बल्कि यहां के प्राईवेट और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों को नई तकनीकि से अवगत कराएंगे। इस फेयर में मोबाइल ट्रामा सेंटर का प्रदर्शन किया जाएगा। यह जर्मन की कंपनी शिवा मेडीकेयर जीएमवीएच ला रहे हैं। यह वैन खास करके दिल्ली में कॉमनवेल्थ के दौरान काफी कारगर साबित हो सकती है क्योंकि इस आधुनिक एंबूलेंस में वह सारी सुविधाएं होंगी जिसमें छोटे से लेकर बड़ा ऑपरेशन तक किया जा सकता है। इसके साथ ही हम अस्पतालों को ऑटो डिस्ट्रेक्टेबल सिरिंज(जिसका उपयोग सिर्फ एक बार हो सके) का प्रयोग करना भी सिखाएंगे। क्योंकि अभी बहुत सी इंफेक्शन की समस्याएं इस सिरिंज का सही उपयोग न करने के कारण हो रहा है। इस फेयर से बिजनेस से अधिक जागरूकता बढ़ाने का काम किया जाएगा। इसमें 100 कंपनियां भाग ले रही हैं जिसमें से 45 भारत से हैं तथा इसमें 5000 बिजनेस विजिटर के भाग लेने की संभावना है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मेडिकल इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्धी बनना सिखाएगा मेडीफेस्ट