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क्या यही है एकता और बंधुत्व

नेहरू विहार के सर्वोदय विद्यालय में हुई घटना, सरकारी स्कूल में घटी कोई पहली घटना नहीं है। सरकारी स्कूलों में न जाने कितनी ही ऐसी घटनाएं रोजाना घटती हैं, पर कोई इसकी खैर-खबर लेने वाला नहीं है। कुछ बाहरी लड़के बेधड़क स्कूल में घुस कर स्कूली बच्चों से लड़ाई करते हैं और स्कूल में तोड़-फोड़ करके चले जाते हैं, और कोई इन्हें रोक नहीं पाता, न तो स्कूल का स्टाफ न ही सकूल में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चे। क्या बच्चों को स्कूलों में एकता और भाईचारे का पाठ नहीं पढ़ाया जाता। आज कोई किसी की मदद करने के लिए आगे नहीं आता, जो जिस हाल में है उसे उसी हाल में छोड़ दिया जाता है।
रवि, नेताजी नगर, नई दिल्ली

टूटे पुलों का करें कल्याण
सुल्तानपुरी में दो पुल तीन सालों से टूटे पड़े हैं। इन पुलों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा। सुल्तानपुरी की जनता को सुबह अपने काम पर जाने में बहुत दिक्कत हो रही है, क्योंकि सुल्तानपुरी से निकलने के लिए सिर्फ एक ही पुल बचा है जिस पर काफी भीड़ रहती है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
शिव कुमार, एफ-2/10, सुल्तानपुरी, दिल्ली

क्या यही है लोकतंत्र
पिछली लोकसभा में पैसे लेकर प्रश्न पूछने का मामला हो या इस शीतकालीन सत्र में प्रश्न पूछ कर सदन से अनुपस्थित होने की बात हो, दोनों ही घटनाएं बताती हैं कि हमारी संसद के प्रति हमारे मंत्रियों में कितना सम्मान है। निश्चित ही यह लोकतंत्र के लिए अच्छी खबर नहीं है।
गौरव सक्सेना, गांधी विहार, दिल्ली

नदारद क्यों न हों सांसद
संसद से नदारद रहे सांसद। नदारद क्यों न हों। जिन लोगों ने उन्हें संसद तक पहुंचाया है, वे तो उनके पास तक जाकर यह नहीं पूछते कि उन्हें क्या परेशानी है। तो वे संसद में क्या करेंगे। जिन्हें गद्दी मिल गई हो उनके लिए क्या जनता क्या संसद। दोनों हाथ घी में सिर कड़ाही में।
प्रयास माहेश्वरी

बसों की कमी
बाहरी मुद्रिका की सेवा अब बहुत ही बुरी हो चली है, खासकर धौला कुआं से आनंद विहार की तरफ जाने वाली। हसनपुर डिपो की बसें आजकल आर. के. पुरम सेक्टर-1 तक ही जा रही हैं बजाय आनंद विहार जाने के। एक तो सरकार ने बेतहाशा किराया बढ़ा दिया है ऊपर से बस भी न मिले तो बहुत बुरा लगता है। कृपया इस पर ध्यान दें।
अरुण सरोहा, बी-391, पीटीएस कॉलोनी, मालवीय नगर, नई दिल्ली

दुबई सकंट से सुरक्षा
दुबई में कार्यरत अप्रवासी भारतीय कामगारों के बेरोजगार होने से उनके सगे-संबंधियों का बजट बिगड़ेगा। हमें ऐसे इंतजाम कर लेने चाहिए ताकि इस मंदी की मार का असर न्यूनतम हो।
युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद

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