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- महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अधर में लटका

अपर गंग नहर पर चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग के दूसरी तरफ बनने वाला एक्सप्रेस-वे तीस हजार पेड़ों की बलि लेगा। आठ लेन के प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे की राह में तीस हजार पेड़ आ गए हैं। सिंचाई विभाग पेड़ों की गिनती में जुट गया है और इन्हें काटने के लिए केंद्र से मंजूरी लेनी होगी।


यूपी को उत्तराखंड से जोड़ने के लिए अपर गंग नहर पर आठ लेन का एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित है। इस एक्सप्रेस वे के लिए 594 हेक्टेयर भूमि की जरूरत पड़ेगी। सिंचाई विभाग के पास 536 हेक्टेयर भूमि है। शेष भूमि किसानों से ली जाएगी। एक्सप्रेस-वे के रास्ते में तीस हजार पेड़ आ गए हैं। मंडलायुक्त ने सिंचाई विभाग को प्रस्ताव बनाकर मुख्य वन संरक्षक के माध्यम से शासन को भेजने का निर्देश दिया है। सिंचाई विभाग पेड़ों पर नंबर डालने और उनका डायमीटर नापने में जुट गया है। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद पेड़ों को काटा जाएगा। एक्सप्रेस वे बनने के बाद उत्तराखंड़ का रास्ता आसान हो जाएगा। इस योजना को लेकर शासन गंभीर है। अभी मेरठ, मुजफ्फरनगर से गुजरने वाली सड़क पर जाम की समस्या आ गई है। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे पुरकाजी के पास पहुंचेगा और उसके बाद उत्तराखंड में प्रवेश कर जाएगा।

एक्सप्रेस-वे
- अपर गंग नहर के दाई तरफ बनेगा आठ लेन हाईवे
- एक्सप्रेस-वे के लिए काटने होंगे तीस हजार पेड़
- 124 किलोमीटर लंबा हाईवे होगा यूपी सीमा में
- 536 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी सिंचाई विभाग की
- किसानों की 58 हेक्टेयर जमीन होगी अधिग्रहित
- चार गांव होंगे एक्सप्रेस वे से प्रभावित

हम इलाके के एक-एक पेड़ पर नंबर डाल रहे हैं। नंबरिंग के साथ-साथ उनका डायमीटर भी नापा जा रहा है। यह तकनीकी काम है और इसमे समय लगता है। एक सप्ताह में प्रस्ताव बनाकर मुख्य वन संरक्षक को भेजा जाएगा।
अजय पाल, अधिशासी अभियंता, अपर गंग नहर

अपर गंग नहर एक्सप्रेस-वे में कटने वाले पेड़ों का प्रस्ताव सिंचाई विभाग को बनाकर देना है। सिंचाई विभाग की जमीन पर यह पेड़ हैं। प्रस्ताव मिलने पर हम उसे शासन को भेज देंगे।
एके द्विवेदी, मुख्य वन संरक्षक, मेरठ क्षेत्र

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  • Web Title:महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अधर में लटका