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नैनीताल और गैरसैंण में भी कैबिनेट!

सरकार कैबिनेट बैठकों को विकेंद्रित करने की तैयारी में है। सूबे की कैबिनेट अब नैनीताल और गैरसैंण की राह पकड़ेगी। कैबिनेट के संभावित नामों में गोमुख का नाम भी जुड़ गया है। नैनीताल के लिए अफसरों को तैयारी करने को कहा गया है।

हर की पौड़ी पर कैबिनेट की चर्चा के बाद बीते तीन दिन से इस सूची में हर रोज नए नाम जुड़ रहे हैं। इसमें अब गैरसैंण, नैनीताल और गोमुख के नाम भी शामिल हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने नैनीताल के लिए हरी झंडी दे दी है जबकि हर की पौड़ी के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

नैनीताल में कैबिनेट के लिए सरकार किसी बड़े इंतजाम की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहां राजभवन परिसर में कैबिनेट संभव है। सरकार के पास वहां कुछ दूसरे भवन भी उपलब्ध हैं। अलबत्ता, मंत्रियों और संबंधित सचिवों को नैनीताल तक पहुंचने की मशक्कत जरूर करनी होगी। बताया गया है कि सीएम डा. निशंक ने नैनीताल में कैबिनेट की तैयारी के लिए अफसरों को निर्देशित कर दिया है।

गैरसैंण के पीछे मूल तर्क यह है कि इससे सरकार के पहाड़ के प्रति संवेदनशील होने का मैसेज जाएगा। साथ ही, गैरसैंण मुद्दे पर भाजपा अपनी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पर बढ़त बनाने की कोशिश में भी है। बताया गया है कि उक्रांद भी इस सांकेतिक पहल के पक्ष में है। गोमुख में भी कैबिनेट बैठक के लिए जोर लगाए जा रहे हैं।

यह भी दबाव बनाया जा रहा है कि कैबिनेट की बैठक गंगा के उद्गम गोमुख में की जाए। चूंकि, इन दिनों गोमुख बंद है। इसलिए इस कैबिनेट के लिए मई तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। सरकार इस मामले में बिहार का पैटर्न अपनाने के मूड में है।

बिहार में नीतिश सरकार ने कैबिनेट बैठकों को पटना से बाहर निकालकर जिलों और गांवों तक पहुंचा दिया है। प्रदेश सरकार भी प्रयोग के तौर पर यह देखना चाह रही है कि नैनीताल या गैरसैंण में कैबिनेट से क्या मैसेज जाएगा और इसका पॉलीटिकल लाभ कितना होगा।

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