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काशी रामकटोरा चर्च लगभग दो सौ साल पुराना

लहुराबीर से पिपलानी कटरा जाने वाले मार्ग पर स्थित रामकटोरा चर्च का इतिहास 200 साल के करीब पुराना है। इस चर्च का निर्माण अंग्रेजों ने करवाया था। बाइबिल एण्ड मिशनरी फेलोशिप ट्रस्ट में एक्ट 1831 के तहत इसका रजिस्ट्रेशन किया गया था।

लहुराबीर स्थित पेट्रोल पंप के बगल में सड़क के किनारे रामकटोरा चर्च है। चर्च में प्रवेश करते ही ऊपर प्रभु यीशु का संदेश लिखा है- परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे हुए लोगों, मेरे पास आओ मैं तुम्हें विश्रम दूंगा। चर्च की ऊंचाई लगभग तीस फुट है। सबसे ऊपर क्रास लगा हुआ है।

यहां पर आराधना के वक्त चर्च के अंदर ही घंटा बजता है। यहां के मुख्य पादरी अखिलेश कुमार माथुर हैं। चर्च के पुरोहित अशोक दान बताते हैं कि यहां पर तीन सर्विस होती है। रविवार को सुबह आठ बजे, सुबह 10 बजे हारवेस्ट संघ तथा जाड़े में शाम 4.30 बजे (सीएनआई) की सर्विस होती है।

चर्च की खजांची शीला पाल बताती हैं : इस चर्च को अंग्रेजों ने बनवाया था। पहले यह पूरा मोहल्ला ही रामकटोरा चर्च कम्पाउण्ड के नाम से जाना जाता था। इसके बगल में जहां अब होटल वगैरह खुल गए हैं, वहां पहले बंगले थे और उन बंगलों में अंग्रेज अफसर रहते थे। यहां पहले 60-70 मसीही परिवार रहा करते थे।

धीरे-धीरे यहां की जमीन बिकती गई और लोगों ने कब्जा भी कर लिया। इस चर्च में कुल 30 मेम्बर हैं। इनमें प्रमुख लोगों में सुब्रतो पाल, अजय भारद्वाज, राजू विल्सन हैं। सेक्रे टरी मोनिका जेवियर हैं। चर्च के अंदर सवा सौ लोगों के बैठने की जगह है।

अंदर बेदी भी है जिस पर क्रास लगा हुआ है। चर्च में प्रभु यीशु के संदेश लगे हुए हैं। क्रिसमस को लेकर चर्च की रंगाई-पुताई भी चल रही है। यहां 15 दिसम्बर से क्रिसमस के प्रोग्राम शुरु हो जाएंगे। इस दिन क्रिसमस ट्री, बोन फायर, कैरेल सिंगिंग व क्रिसमस फादर का आगमन होगा।

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