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सिर्फ 6 फीसदी युवा सुनियोजित क्षेत्र में

इसरो के पूर्व सचिव एवं जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. वाईएस राजन ने इस बात पर चिंता जताई कि हमारे देश में कुल नौकरी पेशा वाले युवाओं में मात्र छह फीसदी ही सुनियोजित क्षेत्र में हैं। इन युवाओं को ही इनकम की गारंटी के साथ ही रिटायरमेंट के बाद की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

बाकी युवा या तो डेली वेजेज या फिर ठेके पर हैं। इनके लिए हर दिन एक नया दिन व ढेर सारी चुनौतियों भरा होता है। उत्तराखंड की प्राकृतिक छठा की तारीफ करते हुए डॉ. राजन ने कहा कि यहां पर गरीबी का भी प्रतिशत काफी है। इन सभी को ध्यान में रखकर तकनीकी व प्रबंधन क्षेत्र के युवाओं को अपने रोजगार की योजनाएं बनानी चाहिए।

डॉ. राजन सोमवार को उत्तराखंड टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने युवाओं को वैश्वीकरण के युग में भारत की स्थिति के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का खुद का बिजनेस हो या फिर रिसर्च एंड डेवलपमेंट समूह सभी को एक समय में केवल एक ही विषय पर ध्यान देना चाहिए। इसी से युवा तरक्की कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार में काफी विविधता है। यहां कई तरह के बिजनेस प्लान सफल हैं।

इससे पहले राज्यपाल मार्गेट आल्वा ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ ही विज्ञान एवं तकनीक लोगों के जीवन को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इंजीनियर, डॉक्टर व प्राफेशनल सभी को अपनी जिम्मेदारी ठीक ढंग से निभानी चाहिए। युवाओं से उन्होंने कहा कि डिग्री मिलने के बाद अब उन्हें अपने करियर में भी अच्छा करना होगा। 

तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की विस्तृत रिपोर्ट रखी। उन्होंने बताया कि 2006 में केवल 11 कॉलेजों के छह हजार छात्र-छात्रओं से यह विवि शुरू हुआ था। आज विश्वविद्यालय से सम्बद्ध 92 कॉलेज व 30 हजार छात्र-छात्रएं पढ़ रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य सचिव नृप सिंह नपल्चयाल, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा राकेश शर्मा, प्रतिकुलपति प्रो. एचसी नैनवाल, कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय कुमार मिश्र सहित कई कॉलेजों के शिक्षक व छात्र-छात्रएं मौजूद थे।

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