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अनुमान से अधिक तेजी से बढ रहा है तापमान

अनुमान से अधिक तेजी से बढ रहा है तापमान

ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में कार्बन डाई ऑक्साइड की भूमिका को लेकर जो भी आंकलन अभी तक किये गये हैं, यह ग्रीनहाउस गैस उस दर में कहीं तेजी से योगदान करती है। एक नये अध्ययन से रविवार को खुलासा हुआ है कि वैज्ञानिकों और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित आईपीसीसी के अध्ययन समूहों ने पूर्व में जो अनुमान लगाये थे, उससे अधिक दर से कार्बन डाई ऑक्साइड पृथ्वी के तापमान में बढ़ोत्तरी कर रहा है।

कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले यह निश्कर्ष जारी किये गये हैं। इस अध्ययन के मुताबिक पूर्व के अनुमानों के विपरीत कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन से दीर्घकालिक अवधि में पृथ्वी के वैश्विक तापमान में 30 से 50 फीसदी अधिक बढ़ोत्तरी की संभावना है।
     
ब्रिटेन स्थित ब्रिस्टल विश्वविद्यालय मे किये अनुसंधान के प्रमुख डैन जे लुंट ने कहा कि पहले के अनुमान में यदि तापमान में तीन फीसदी बढ़ोत्तरी का आकलन था तो हमारे निष्कर्ष के अनुसार दीर्घकालिक तौर पर तापमान में साढे तीन से साढ़े चार फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। नेचर जियोसाइंसेज जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक इंटरगवर्नमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) सहित अन्य क्लाइमेट माडल (जलवायु से संबंधित माडल) दीर्घकालिक समय में पृथ्वी के जलवायु चक्र में बदलते रहने वाले घटकों जैसे स्थलीय बर्फ और वनस्पति आदि पर पूरी तरह विचार नहीं करते।

डैन ने कहा, वनस्पति और बर्फ में बदलाव के कारण सूर्य के प्रकाश का अवशोषण अधिक होता है जिससे तापमान में बढ़ोत्तरी होती है। इस अध्ययन में सहयोग करने वाले एलन हेवुड ने कहा कि खतरनाक जलवायु परिवर्तन को यदि हम टालना चाहते हैं तो हमें पर्यावरणीय ग्रीन हाउस गैसों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लक्ष्य तय करते समय पृथ्वी के प्रति कार्बन डाई ऑक्साइड की संवेदनशीलता को भी गंभीरता से लेना होगा।
    
अध्ययन समूह ने जलवायु परिवर्तन के उन माडलों से तुलना की जिन्होंने 30 लाख वर्ष पहले कार्बन डाई ऑक्साइड की प्रचुरता वाली स्थिति की कल्पना कर अपने वर्तमान माडल दिये थे जो इस ग्रीन हाउस गैस के कारण तापमान में बढोतरी की सही सही तस्वीर नहीं दे पा रहे थे। कार्बन डाई ऑक्साइड मानवीय गतिविधियों के कारण उत्सर्जित होने वाली सबसे सामान्य ग्रीन हाउस गैस है जिसमें पृथ्वी से परावर्तित सूर्य की उष्मा फंस जाती है और धरती का तापमान सहज बना रहता है। लेकिन वायुमंडल में इस गैस के स्तर के अधिक होने से वैश्विक तापमान में असामान्य बढ़ोत्तरी होती है जो समुद्र के जल स्तर को बढ़ाने के साथ साथ ग्लेशियरों और ध्रुवों पर जमी बर्फ को तेजी से पिघलाता है।

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