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सप्ताह के व्रत-त्योहार (6 से 12 दिसम्बर, 2009)

7 दिसम्बर (सोमवार) को भद्रा प्रारम्भ रात्रि 8 बजकर 29 मिनट से। नेपच्यून (वरुण) कुम्भ राशि में।
8 दिसम्बर (मंगलवार) को भद्रा समाप्त प्रात: 7 बजकर 35 मिनट पर।
9 दिसम्बर (बुधवार) को बुधाष्टमी पर्व। कालाष्टमी। अष्टका पुपाष्टका, वैक्कटाष्टमी (केरल) तथा रुक्मिणी अष्टमी।
अष्टमी : पौष कृष्ण अष्टमी को व्रती रुक्मिणी और प्रद्युम्न की मूर्तियों को षोडशोपचार पूजा करके उत्तम पदार्थ अर्पण करें। अगर सुवासिनी अच्छे वस्त्रों वाली (सौभाग्यवती) 8 स्त्रियों को भोजन करवाकर दक्षिणा दें तो रुक्मिणी जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है।
10 दिसम्बर (बृहस्पतिवार) को भद्रा प्रारम्भ रात्रि 3 बजकर 21 मिनट से। अन्वष्टका।
11 दिसम्बर (शुक्रवार) को भद्रा समाप्त मध्याह्न 2 बजकर 57 मिनट पर, पौष दशमी एवं श्री पाश्र्वनाथ का जन्मदिन (जैन)।
दशमी व्रत : इस व्रत के प्रभाव से राजपुत्र अपना राज्य, कृषक खेती, वणिक व्यापार में लाभ, पुत्रर्थी पुत्र तथा मानव धर्म, अर्थ एवं काम की सिद्धि प्राप्त करते हैं। कन्या श्रेष्ठ वर प्राप्त करती हैं, ब्राह्मण निर्विघ्न यज्ञ संपन्न कर लेता है, रोगी रोग से मुक्त हो जाता है और पति के चिर प्रवास हो जाने पर स्त्री उसे शीघ्र ही प्राप्त कर लेती है। शिशु की दंतजनित पीड़ा में भी इस व्रत से पीड़ा दूर हो जाती है और कष्ट नहीं होता। इसी प्रकार अन्य कार्यो की सिद्धि के लिए यह व्रत करना चाहिए। जब भी जिस किसी को कोई कष्ट पड़े, उसकी निवृत्ति के लिए इस व्रत को करना चाहिए।
12 दिसम्बर (शनिवार) को सफला एकादशी व्रत सबका। सुरूप द्वादशी व्रत।

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