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दो टूक (05 दिसंबर, 2009)

सीबीआई पूरे मुल्क को सहमा देने वाले हत्याकांड की गुत्थियां सुलझाने में नाकाम है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक आरुषि तलवार के मोबाइल से कुछ पता नहीं चला।

अधकचरा तफ्तीश के बाद नाकामी छिपाने की हड़बड़ाहट में एक के बाद दूसरे पर उंगली उठाने और कीचड़ उछालने का सिलसिला। इस हत्याकांड और इसकी जांच ने किसे नहीं रुलाया? मां-बाप, नौकर-चाकर, दोस्त-पड़ोसी, डॉक्टर और पुलिसवाले, शक की बिना पर तलवार सब पर लटकी लेकिन सब ‘बरी’ होते गए। शर्मसार करने वाली इस जांच के बाद अगर कटघरे में खुद जांच एजेंसी हो तो क्या गलत है?

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