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भालुओं ने बढ़ाया लोगों में भय

गुलदार के बाद पहाड़ों में भालुओं का कहर ग्रामीण अंचलों के लोगों के जीवन में खलल डाल रहा है। दरअसल इस सर्द मौसम में भोजन की तलाश में निचले इलाकों में आ रहे भालुओं का न चाहते हुए भी मानवों से सामना हो रहा  है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि भालुओं के हमलों से बचाव के लिए घने जंगलों में नहीं जाना चाहिए।

गढ़वाल मंडल के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों भालू का कहर व्याप्त है। गढ़वाल वन प्रभाग के अंतर्गत ढाईज्यूली पट्टी के कठूड़ गांव की दो महिलाओं पर बुधवार को भालू ने हमला कर दिया था। इस हमले में एक महिला की मौत हो गयी थी और दूसरी चिकित्सालय में है।

पहाड़ी इलाकों में इन दिनों भालुओं के बढ़ते हमलों का कारण भोजन का संकट है। ऊंचे क्षेत्रों के जंगलों में इन दिनों कड़ाके की ठंड हो जाती है और वहां भालुओं के लिए आहार का भी संकट पैदा हो जाता है, जिस कारण भालू  सर्दी से बचने और भोजन की तलाश में निचले क्षेत्रों के जंगलों में चले आते हैं। सर्दियों के इस मौसम में निचले स्तर के जंगलों में मेहल (जंगली नाशपाती) और भमौरा आदि जंगली फल बहुतायत होते हैं, जो कि भालुओं का प्रिय आहार माना जाता है। भालुओं की उपस्थिति बांज-बुरांश के घने जंगलों में अक्सर देखी गयी है।

भालुओं के साथ मानव की भिड़ंत अक्सर घने जंगलों में ही होती है। कभी भी भालू  घनी बस्ती के निकट नहीं जाता। घने जंगल में जब भी मानव गया है तो वहां अक्सर भालु से उसका टकराव हो ही जाता है। भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ डीएन सेमवाल इस बात को आगे बढ़ाते हुए लोगों को सुझाव देते हैं कि इस समय अकेले मे घने जंगल में जाने से बचना होगा। यदि कभी जरूरत भी पड़े तो झुंड में जाएं।  उनके मुताबिक भालू आदमखोर प्रवृत्ति के नहीं होते हैं। अक्सर मानव व भालू के बीच मुठभेड़ अचानक ही हो जाती है। 

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