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बीमारियों को कैश कराता हिन्दी सिनेमा

इश्क और आतंकवाद के इर्द-गिर्द मंडराने वाला हिन्दी सिनेमा अब बीमारियों का कर्णधार बन गया है। दुनिया की सभी घातक बीमारियों से रूबरू कराने का जिम्मा डॉक्टर नहीं, हिन्दी सिनेमा के कंधों पर है। दुनियाभर की बीमारी खोजकर, नए नाम के साथ लोगों तक पहुंचाना हिन्दी सिनेमा का काम है।

कभी वो ‘गजनी’ में भूलने की बीमारी को ‘एंटैरो ग्रेसइम्नीसिया’ बताता है, तो कभी ‘कोई मिल गया’ के जरिए ‘ओटिज्म’ बड़ी उम्र के बच्चों में छोटा दिमाग दिखाता है।  हिन्दी सिनेमा इन दिनों बीमारियों की खबर देने वाला खबरी है। जिसे देखकर देशभर में उस बीमारी से ग्रसित रोगी और इलाज की छानबीन होने लगती है।

सिनेमा जगत में बीमारियों पर फिल्में बनाने का चलन मध्यक ाल से है। 1970 में चंदर वोहरा की फिल्म खिलौना में संजीव कुमार को बीमारी का शिकार दिखाया, फि ल्म हिट हुई। तो1975 में ऋषिकेष मुखर्जी ने ‘मिली’में
जया भादुड़ी को कैंसर रोगी दिखाया। फिल्म हिट गई। एक साथ बीमारी पर बनी दो फिल्मों को सफल देख, निर्माता निर्देशकों को बीमारी पर फिल्में बनाने का चस्का लग गया। और हिंदी सिनेमा में बीमारी युक्त फिल्मों की बहार आ गई। और फिल्मों के मुख्य किरदार भयानक बीमारी के रोगी बनने लगे।

खास बात यह कि फिल्मों के लिए अदाकारों ने लुक बदलने में कमी नहीं की। सदमा में श्रीदेवी और ब्लैक के लिए रानी पागल बनीं, गजनी में आमिर ने सिक्स पैक और हेयर स्टाइल बनाया। वहीं फिल्म तारे जमीं के लिए आमिर ने खास जोकर वाला स्टाइल अपनाया। कोशिश, खून का रिश्ता, 1983 में श्रीदेवी-कमलहासन की फिल्म ‘सदमा’, अनाड़ी, बेटा, फिर मिलेंगे, कोई मिल गया, ब्लैक, क्रेजी-4 तारे जमीं पर और गजनी ऐसी प्रमुख फिल्में हैं, जिन्होंने केवल बीमारी के दम पर हिट किया।

शुक्रवार को रीलिज हो रही फिल्म ‘पॉ’ भी बीमारी लेकर सिनेमाघरों में आ रही है। फिल्म ‘प्रीजेरिया’ नामक बीमारी से ग्रसित है। जिसमें कम उम्र में शरीर बूढ़ा हो जाता है, मगर दिमाग बच्चा रहता है। निर्देशक आर बालकृष्णन की फिल्म ‘पॉ’ 13 वर्षीय  ‘ऑरो’(अमिताभ बच्चान) पर टिकी है। ‘ऑरो’ ‘प्रीजेरिया’ नामक बीमारी का शिकार है। जिसके कारण 13 साल की उम्र में वह 55 वर्षीय बूढ़ा दिखता है।

बीमारी से ‘ऑरो’ कद और आदतों में बूढ़ों की तरह हो जाता है। मगर उसका मस्तिष्क बच्चों जैसा है। ‘ऑरो’ के अभिभावक  (विद्या बालान और अभिषेक बच्चान) बेटे का बेहतर से बेहतर इलाज कराते हैं। अंत तक फिल्म यही प्रश्न छोड़ती है कि ‘ऑरो’ का क्या होगा? मतलब बीमारी का इलाज कहां?

बीमारी पर फिल्में और उनकी बीमारियां

मिली---कैंसर
खून का रिश्ता---ब्लड कैंसर
 फिर मिलेंगे---एड्स
ब्लैक---एलजाइमर्स
कोई मिल गया---ओटिज्म
तारे जमीं पर --- डीस्लेक्सिया
क्रेजी-4   ---साइजोफ्रेनिस
गजनी      --- शार्ट टर्म मैमोरी लॉस(एंटैरो ग्रेसइम्नीसिया)
पॉ         ---  प्रीजेरिया


जारी रहेगी बीमारी


फिल्मों में बीमारी 2010 में भी दिखेगी। शाहरूख की आने वाली फिल्म ‘मॉय नेम इज किंग खान’ में  शाहरूख ‘एसपरगस सिंड्रोम’ से पीड़ित हैं। तो रितिक रौशन फिल्म ‘गुजारिश’ में ‘पैराप्लेगिया’ की मरीज बनकर आएंगे।

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