class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पाकिस्तानी ने बेच डाली करोड़ों की संपत्ति

पाकिस्तान की कई कंपनियों में डायरेक्टर और एक्जीक्यूटिव  डायरेक्टर, पता कराची का। 1965 तक भारतीय रहे, फिर पाकिस्तान चले गये,1971 में ब्रिटेन की नागरिकता ले ली और यहाँ कानपुर के गोकुल अपार्टमेंट में बैठकर भारत में अपनी करोड़ों की सम्पत्ति बेच डाली। डीएम ने शत्रु सम्पत्ति अभिरक्षक मुम्बई को रिपोर्ट भेजी है कि जाजमऊ की पायनियर टेनरी वास्तव में शत्रु सम्पत्ति है जिसे हेरफेर कर बेच डाला गया है। उन्होंने सम्पत्ति को कब्जे में लेने का भी अनुरोध किया है।

1965 तक भारतीय नागरिक रहे नजर मोहम्मद के परिवार के कुछ लोग युद्ध के दौरान पाकिस्तान जाकर बस गये। भारत में छूटी उनकी सम्पत्ति शत्रु सम्पत्ति हो गई, जो भारत सरकार के अधीन हो गई। इनकी मुख्य सम्पत्ति पायनियर टेनरी (पायनियर लेदर एंड फिनिशिंग प्राइवेट लिमिटेड) थी जो काफी समय तक यूं ही पड़ी रही।

नजर मोहम्मद के बेटे एस.हिमायूँ ने 1971 में ब्रिटेन की नागरिकता ली। साथ ही वे पाकिस्तानी नागरिक भी बने रहे। ब्रिटेन की नागरिकता के सहारे उन्होंने यहाँ 602, गोकुल अपार्टमेंट में ठिकाना बनाया और पायनियर टेनरी की जमीन बेचनी शुरू कर दी।

रिकार्ड में उन्होंने खुद को ब्रिटेन का नागरिक बताया। उन्होंने जब 12 लोगों को करीब 10 करोड़ की सम्पत्ति बेच डाली तो कुछ लोगों ने इसकी शिकायत शत्रु सम्पत्ति अभिरक्षक, मुम्बई से की। मार्च 2009 को शत्रु सम्पत्ति अभिरक्षक ने डीएम से रिपोर्ट माँगी तब इसकी जाँच-पड़ताल शुरू हुई।   

पड़ताल में पता चला कि एस. हिमायूँ कराची की फर्म पायनियर स्पिनिंग मिल्स लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। फर्म के रिकार्ड में उनका कराची का पता दर्ज हैं और वे पाकिस्तान के नागरिक हैं। इसके अलावा वह कई और फर्मो के डायरेक्टर हैं और सभी में कराची का पता है।

जाँच में पता चला कि उन्होंने 1971 में ब्रिटेन की नागरिकता ली है यानी इस बीच वे पाकिस्तान के ही नागरिक रहे। पाकिस्तान दूतावास से 31 मार्च 1994 को प्रमाणित फार्म-ए में भी उनका पता कराची का दर्शाया गया है। यही नहीं एस.हिमायूँ ने पासपोर्ट में भी हेराफेरी की, उनके भारत आने का प्रमाण व सूचना नहीं है। हालांकि एलआईयू उनके पकिस्तानी होने का कोई साक्ष्य नहीं खोज पायी।

डीएम के अनुसार उनकी पाकिस्तानी नागरिकता साबित हो चुकी है। इसके बावजूद अगर वह अपने को ब्रिटेन का नागरिक कहते हैं तो भारत में कोई सम्पत्ति बेचने के लिए रिजर्व बैंक से अनुमति लेनी जरूरी थी। यह फेमा का उल्लंघन है। डीएम ने सम्पत्ति के खरीदारों को भी नोटिस दिए जिसमें उन्होंने गोलमोल जवाब दिए हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पाकिस्तानी ने बेच डाली करोड़ों की संपत्ति