class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो छोरों का विकास

दिल्ली में अगर आप रहते हैं तो हर 15-20 दिन में एक खबर जरूर पढ़ते हैं कि डीटीसी नया क्या करने जा रही है। मसलन हर छह महीने में बस स्टॉप का ऐसा एक नया डिजाइन होता है कि न्यूयॉर्क का टोक्यो में ऐसा बस स्टॉप क्या होगा। मसलन उसमें टेलीफोन बूथ होगा, एटीएम होगा, बैठने के लिए अत्याधुनिक कुर्सियां होंगी, शीतल पेय, चाय-नाश्ते वगैरा का इंतजाम होगा। इन सुविधाओं की फेहरिस्त बढ़ती ही जाती है कपड़ों की दुकान होगी, मैकडोनल्स और पिज्जाहट होगा, पूरा मॉल होगा। गर्ज यह कि जो सुविधाएं हवाई अड्डों पर नहीं होतीं वे दिल्ली के सिटी बस के सैकड़ों बस स्टॉप पर होंगी।

अब खबर आई है कि हर बस में जीपीएम सिस्टम लगेगा ताकि हर बस स्टॉप पर एक इलेक्ट्रॉनिक डिसप्ले बोर्ड आपको यह बता सके कि कौन सी बस कितनी देर में स्टॉप पर आने वाली है, बल्कि आप अपने मोबाइल पर एक नंबर डायल करेंगे तो मोबाइल में संदेश आ जाएगा कि आपकी बस कब पहुंचने वाली है।

हम मान लें कि ऐसा सब हो भी जाएगा और दिल्ली के बस स्टॉप इक्कीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध का दृश्य देने लगेंगे, लेकिन इन सबके बाद स्टॉप पर बस कौन सी आएगी? इन सबके बाद जो बस स्टॉप पर आएगी वह वही पुरानी ब्लू लाइन बस होगी, जिसके टीन टप्पर उखड़ रहे होंगे, खिड़कियों के शीशे गायब होंगे, सीटें उखड़ीं और फटी हुई होंगी। दो चार शोहदे बस के टीन टप्पर को पूरी तन्मयता और जोश से बजा रहे होंगे। वह बस, बस स्टॉप पर नहीं, कुछ आगे या पीछे खड़ी होगी, सड़क के किनारे नहीं बीचों-बीच। परिस्थिति के मुताबिक या तो तीर की तरह चल देगी या स्टॉप पर दस मिनट खड़ी रहेगी। बस में चढ़ने वाले यात्री तमाम खतरों को ङोलकर बस तक पहुंचेंगे और उससे ज्यादा खतरनाक यात्रा शुरू करेंगे।

यह दिल्ली सरकार की मजबूरी है। बस स्टॉप को अत्याधुनिक बना कर वह टाई वाले अंग्रेजी बोलने वाले लोगों का व्यापार बढ़ाती है जो कंप्यूटर, जीपीएस वगैरा बेचते हैं और डीटीसी के अफसरों की ऊपरी कमाई होती है। ब्लू लाइन बसें चलाकर वह ब्लू लाइन माफिया को उपकृत करती है, जिनका दिल्ली देहात या निम्नमध्य वर्गीय बस्तियों में रौब चलता है। इससे वह उन पुलिस वालों, दलालों, अपराधियों को खुश रखती है, जिनको खुश रखने के अपने फायदे हैं। यह बात और है कि दिल्ली की ज्यादातर जनता इन दोनों छोरों पर नहीं है, लेकिन उसकी फिक्र किसे है? क्या विकास का यही मॉडल सारे देश में, सारे क्षेत्रों में नहीं अपनाया जा रहा है?

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो छोरों का विकास