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गवांणा गाड़ का गार्डर ब्रिज बना खतरा

वर्ष 1991 के भूकंप के दौरान गणेशपुर गांव के पास गंगोत्री राजमार्ग को जोड़ने वाला क्षतिग्रस्त गार्डर पुल गांव पर कभी भी कहर बरपा सकता है। बरसात से पहले पुल न हटा तो कभी भी बड़ी आपदा हो सकती है।
गंगोत्री राजमार्ग के गणेशपुर गांव में भूकंप के दौरान हैवी वाहन मोटर पुल जमींदोज हुआ था।

राजमार्ग पर आवाजाही ठप होने के बाद बीआरओ ने गंवाणा गाड़ में क्षतिग्रस्त पुल के ऊपर नया पुल बनाया था, जिससे नदी का मुख्य प्रवाह पूरी तरह बंद है। दो दशक की अवधि बीतने पर भी पुल का कबाड़ न हटाने से गणेशपुर गांव, गढ़वाल मंडल विकास निगम की मिनरल वाटर फैक्ट्री, काष्ठ उद्योग आदि खतरे में हैं। राज्य पुनर्गठन से पहले सेतु निगम द्वारा बनाए गए इस पुल को हटाने के लिए बीआरओ ने तीन वर्ष पूर्व नीलामी आमंत्रित की थी, किन्तु यूपी व उत्तराखंड सरकार की सपंत्ति विवाद से पुल नहीं हट पाया।

अब स्थिति यह है कि बारिश होते ही गणेशपुर के लोगों की रूह कांप उठती है और लोग रातभर सो नहीं पाते। नदी के बीचों-बीच गिरे पुल पर मलबा व कबाड़ जमा होने के कारण बादल फटने तथा अधिक बारिश की स्थिति में गंगोत्री राजमार्ग पर बने नये पुल समेत बस्ती पर कहर बरप सकता है। गांव के प्रधान बिहारी लाल, प्रताप सिंह, पूर्व प्रधान धर्म सिंह चौहान, बीपी बडोला, त्रेपन सिंह, आदि ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन, बीआरओ व शासन को कई पत्र लिखे, किन्तु कोई कार्यवाही अमल में नहीं लायी गई।

 ग्रामीणों ने बताया कि नदी पर 1972 से पहले तीन पुल बाढ़ व बादल फटने से बह चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। उधर जिलाधिकारी डा. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि उक्त प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने बताया कि वह मामले की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करेंगे। 

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