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उपलों से भरे हैं फुटपाथ

सड़कों की खूबसूरती के लिए बने फुटपाथों पर यदि गोबर के उपले नजर आएं तो समझ लीजिए कि आप उत्तर प्रदेश के द्वार कहे जाने वाले नोएडा पहुंच चुके हैं। हालांकि, इनको दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन, इनकी खूबसूरती में चार चांद लगाने वाले गोबर के उपले कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं।

शहर में करीब सौ किलोमीटर के दायरे में फुटपाथ बने हुए हैं। नोएडा में इन फुटपाथों का मकसद सिर्फ सड़क की सौंदर्यीकरण से है। इनकी देख-रेख के लिए हर साल दो से तीन करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। तीनों मास्टर प्लॉन रोड सहित कई लिंक रोड पर भी फुटपाथ बने हुए हैं। गोल-चक्कर से रजनीगंधा रोड, सेक्टर-35 से डीपीएस चौराहा, कालिंदीकुंज रोड, सेक्टर-62 से ममूरा चौक, 12-22 चौक से सेक्टर-58 चौक, सेक्टर-35 से शॉप्रिक्स मॉल समेत दो दर्जन जगहों पर पुटपाथ बने हुए हैं। जिनकी यह हालत है। इन पर लगे पत्थर उखड़ चुके हैं, रेलिंग टूटी हुई है। इन पर पैदल यात्री तो नहीं चलते। हां गोबर के उपले पाथ कर सुखाने का अड्डा जरूर बन चुके हैं।

निठारी के पास उपले पाथने वाली महिला नीरू का कहना है कि अभी तक किसी ने मना नहीं किया है। एक अन्य महिला सुखदा का कहना है कि फुटपाथ खाली पड़ा है, तो सुखा लेते हैं। अगर कोई मना करेगा तो नहीं पाथेंगे।

ऐसे लोगों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। यही नहीं ऐसे लोगों के खिलाफ अथॉरिटी का अतिक्रमण विभाग भी कार्रवाई करता है। यह सही है कि फुटपाथ कोई गोबर के उपले बनाने के लिए नहीं बनाए गए हैं।

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