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एफडीए कसेगा मिलावट खोरों पर शिकंजा

खाद्य पदार्थों के मिलावट खोरों पर अब और शिकंजा कसा जाएगा। छापेमारी की कार्रवाई के लिए प्रदेश के सभी जिलों में एफडीए को प्रभावी बनाने के लिए कारगर प्रयास किए जा रहे हैं। फूड इंस्पेक्टरों नक्कालों के खिलाफ डीएम के निर्देश पर सीधे छापामार कार्रवाई करेगा।

एफडीए सचिव ने माना कि प्रदेश में लखनऊ के इकलौते लैब पर लोड काफी है, सो फूड व ड्रग्स के हजारों सैंपलिंग के मामले पैंडिंग हैं। खाद्य एवं औषधि नियंत्रक  विभाग (एफडीए) के सचिव डी.एस. मिश्र और निदेशक कैप्टन एसके द्विवेदी ने संजय नगर स्थित आईपीएल लैब में विशेष मुलाकात में यह बातें कहीं।

मिश्र ने लोंगों से भी अपील की वे एफडीए की मदद करें, तथा जागरूक हों, पैसा खर्च करने के बाद भी दूध के नाम पर सोडा व पाऊडर तथा बीकासूल कैप्सूल के नाम पर बेसन की दवाएं न खाएं। ऐसे नक्कालों के खिलाफ जागरुक हों, अभियान छेड़ें, बाकी का काम एफडीए का कानून करेगा।

मिश्र ने बताया कि खाद्य पदार्थों के संबंध में चले कैम्पेन में पूरे प्रदेश में जबरदस्त कामयाबी मिली है। 08 से 24 अक्टूबर तक के अभियान में लगभग दो करोड़ के नकली खोया, पनीर, मावा, घी आदि पकड़े गए। जबकि डेढ़ सौ लोंगों की गिरफ्तारी हुई है। इसके बाद 16 से 30 नवंबर तक ड्रग्स कैंम्पेन में डेढ़ करोड़ की नकली दवा पकड़ी गई और एक दर्जन मिलावट खोर पकड़े भी गए।

खाद्य व दवा के क्षेत्र में मिलावट-खोरी करके आम-जन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के साथ ही दस लाख की नकद पैनाल्टी का भी प्रावधान है। सैंपलिंग के केस जल्द निस्तारित हों। वैसे तो इसके लिए प्रदेश में लखनऊ को छोड़कर मेरठ, आगरा समेत पांच और शहरों में दो साल के भीतर रीजनल लैब बनकर तैयार कर लिए जाएंगे।

तब तक लखनऊ के अलावा रेयर केस में सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेट्री कोलकाता तक की मदद ली जा सकती है। इतना ही नहीं लोंगों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों को जल्द ही सजा मिले, इसकी सुनवाई के लिए फास्ट ट्रेक की तर्ज पर अलग कोर्ट तक बनाने की योजना है। मिश्र ने बताया कि फूड इंस्पेक्टरों को अब एफडीए के तहत खाद्य पदार्थों व नकली दवाईयों के गोरखधंधा में संलिप्त लोंगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। 

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