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हुकूमत के हाथ में होगी आपकी नब्ज

हुकूमत के हाथ में होगी आपकी नब्ज

टेलीफोन बिल, इनकम टैक्स रिकॉर्ड से लेकर रेडलाइट जम्प या नशे में गाड़ी चलाने जैसी तमाम नागरिक सूचनाओं को दर्ज करने वाले दो दर्जन से ज्यादा डेटाबेस को जोड़ने के अब तक के सबसे बड़े प्रोजेक्ट का मंगलवार को श्रीगणेश हो गया। बुनियादी रूप से आतंकवाद के खात्मे को बनाए जा रहे राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड को तय समयसीमा के भीतर खड़ा कर लेने के लिए सरकार ने कमर कस ली है।

प्रोजेक्ट की कमान पूर्व सैनिक कैप्टन रघु रमन के हाथों सौंपी गई है। रमन सेना छोड़ने के बाद लगभग एक दशक तक निजी क्षेत्र की महिन्द्रा स्पेशन सर्विस ग्रुप में बतौर सीईओ काम कर चुके हैं। कै. रमन ने मंगलवार को अपना कार्यभार संभाला। रमन डेढ़ साल के भीतर देश के पहले राष्ट्रीय खुफिया ढांचे को खड़ा करेंगे। इसके बाद उन्हें ज्यादा से ज्यादा छह महीने का विस्तार दिया जा सकता। मंगलवार को गृहमंत्री चिदंबरम ने यह जानकारी दी।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियां नागरिकों के नाम या फिंगरप्रिंट के अलावा वे तमाम जानकारियां जुटाएंगी, जो उनके बीते दिनों से संबंधित हैं। गृहमंत्री के मुताबिक नागरिक सेवाओं से जुड़े 21 सार्वजनिक संगठनों के डेटाबेस को दस सुरक्षा एजेंसियां खंगाल सकेंगी। एक तरह से यह देश का सबसे बड़ा आंकड़ा कोष होगा जो बाद में नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में बन रहे यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर प्रोजेक्ट से भी जोड़ा जाएगा। चिदंबरम ने आश्वस्त किया कि इस सबके बावजूद नागरिकों की प्राइवेसी का पूरा खयाल रखा जाएगा। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि डेटाबेस पर कोई सेंध नहीं लगा सके।

गृह मंत्रालय को सभी इमीग्रेशन कार्यालयों, क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालयों व विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों से जोड़ने की भी योजना पर काम चल रहा है। गृह सचिव जी.के. पिल्लई के मुताबिक योजना के लागू होते ही सभी इमीग्रेशन कार्यालयों से रियल टाइम कनेक्टिविटी हो जाएगी। चिदंबरम ने बताया कि इससे वीजा आवेदन करते वक्त ही आगंतुक के बारे में सभी सूचनाएं मिल जाएंगी।

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