class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गन्ना मूल्य बढ़वाने गए किसान घर लौटे

गन्ना मूल्य बढ़वाने के लिए लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे प्रदेश भर के गन्ना किसान मुख्यमंत्री मायावती के आश्वासन के बाद घर लौट गए। ये किसान मंगलवार सुबह से ही भारतीय किसान यूनियन नेता महेन्द्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में लखनऊ स्थित रेलवे स्टेडियम में पंचायत लगाए हुए थे। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक गन्ने का न्यूनतम मूल्य 280 रुपए प्रति कुंतल नहीं हो जाता तब तक वे प्रदेश के किसी भी चीनी मिल को गन्ना नहीं देंगे।

भाकियू नेताओं ने साफ कहा कि अपने उत्पाद का मूल्य किसान ही तय करेगा। अगर प्रदेश में वाजिब दाम नहीं मिला तो यहां का किसान अपना गन्ना उत्तराखण्ड और हरियाणा की चीनी मिलों को दे देगा। अगर यूपी सरकार ने इसमें कोई बाधा उत्पन्न की तो वे उसका पुरजोर विरोध करेंगे।

रेलवे स्टेडियम में किसानों की सभा को संबोधित करते हुए चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत ने कहा कि पिछले डेढ़ माह से किसान अपनी उत्पाद का मूल्य तय कराने के लिए दिल्ली और लखनऊ के बीच धक्के खा रहा है लेकिन, सरकार और जिम्मेदारों की नींद नहीं खुल रही। किसान फसलें जला रहे हैं। आत्महत्या कर रहे हैं पर कोई सुनने वाला नही है। जबकि इस स्थिति के लिए सरकार पूरी तरह से दोषी है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल 15 रुपए किलो चीनी थी और 140 से 145 रुपए कुंतल गन्ना था। लेकिन इस बार 35 से 40 रुपए किलो चीनी बिक रही है और गन्ना का मूल्य पिछले साल के बराबर ही है। टिकैत ने कहा कि एक कुन्तल गन्ने में दस किलो चीनी निकलती है। इसके अलावा इथेनॉल, शीरा व मौलेसिस अलग से निकलते हैं। जिसे बेचकर चीनी मिलें काफी मुनाफा कम रही है। उन्होंने कहा कि आज 35 रुपए किलो चीनी है तो गन्ने का मूल्य भी 350 रुपए कुंतल होना चाहिए।

लखनऊ के बसन्त कुंज योजना के बारे में टिकैत ने कहा कि 40 से 50 पैसे वर्ग फुट के हिसाब से किसानों के खेत अधिग्रहित कर उसे 10 हजार से 20 हजार रुपए वर्गफुट बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण मार्केट रेट पर होना चाहिए। भाकियू नेता ने कहा कि सिंचाई के अभाव में बुन्देलखण्ड के खेत पथरीले होते जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि जब गुजरात से मथुरा तक तेल की पाइप लाइन आ सकती है तो बन्देलखण्ड तक नहरें क्यों नहीं बनाई जा सकती।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गन्ना मूल्य बढ़वाने गए किसान घर लौटे