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गंगा-यमुना के दोआब में खोजे जाएंगे सभ्यता के चिन्ह

गंगा-यमुना के दोआब में सदियों से दबे सभ्यताओं के चिन्हों को खोजने का बीड़ा अब सीसीएसयू उठाएगा। इलाहाबाद विवि द्वारा कौशांबी पर कराए गए कार्य की तर्ज पर सीसीएसयू भी दोआब पर कार्य करेगा। पूर्व में पर्दे से बाहर आ चुके ऐतिहासिक स्थलों को भी विवि ने गोद लेते हुए अपनी देखरेख में कार्य कराने की योजना बनाई है। विवि ने दोनों स्तर पर एएसआई को प्रपोजल भेज रहा है।

इलाहाबाद विवि के प्रो. जीआर शर्मा ने कौशांबी पर कार्य करके न केवल विवि के नाम उपलब्धि जोड़ दी बल्कि इसके बाद यूपी में कोई दूसरा विवि ऐतिहासिक साइट पर काम नहीं कर पाया। गंगा-यमुना के दोआब में ऐतिहासिक सभ्यता के मिट्टी की पर्तो के नीचे दबे होने के बावजूद यहां पर भी कोई बड़ा काम नहीं हुआ। केवल एएसआई ने तीन साइटों पर खुदाई की, लेकिन सीसीएसयू का इतिहास विभाग दोआब के सभ्यताओं को खोजने का बीड़ा उठाने जा रहा है।

एचओडी प्रो. आरएस अग्रवाल के अनुसार दोआब क्षेत्र को अपर, मिडिल और अपर वर्ग में बांटा गया है। अपर में सहारनपुर से हरियाणा और आगरा तक का क्षेत्र है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से धनी है, लेकिन यहां वृहद स्तर पर काम ही नहीं हुआ। प्रो. अग्रवाल के अनुसार विवि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी एएसआई को दोआब क्षेत्र में विवि स्तर पर काम करने की अनुमति देने का प्रस्ताव भेज रहा है।

अनुमति के बाद विवि इस क्षेत्र में इलाहाबाद विवि की तर्ज पर काम कराएगा। चिन्हीकरण और धरोहरों को सहेजने का काम भी विवि करेगा। विवि सिनौली, आलमगिरपुर और हस्तिनापुर में एएसआई साइट को भी गोद लेकर आगे का कार्य कराएगा। प्रो.अग्रवाल के मुताबिक तीनों क्षेत्र में सभ्यताओं की निशानियां मिली हैं, लेकिन खुदाई का कार्य एक सीमा के बाद रुक गया। तीनों साइटों को गोद लेने का प्रस्ताव भी एएसआई को भेजा जा रहा है।

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