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.. क्योंकि चीता भी पीता है

पुलिस की डय़ूटी में गश्त सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। नियमित गश्त न होने के कारण क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं का ग्राफ बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस दिन-रात गश्त करती है। इसीलिए प्रत्येक चौकी क्षेत्र में नियमित गश्त के लिए एक चीता मोबाइल वाहन (बाइक) उपलब्ध रहता है।

प्रत्येक पुलिस चौकी में चीता मोबाइल के लिए मासिक 25 लीटर पेट्रोल का कोटा निर्धारित है। लेकिन चीता मोबाइल में उपलब्ध पेट्रोल की यह कमी पुलिस कर्मियों को गश्त के प्रति लापरवाह बना रही है। पुलिस कर्मियों का कहना है कि यह कोटा मुश्किल से बीस दिन चल पाता है।

ऐसे में पूरे महीने नियमित गश्त के लिए अपनी जेब से खर्चा करना पड़ता है। ऐसे में पुलिस कर्मियों में यह खर्चा बचाने की प्रवृति पैदा हो जाती है। पुलिस कर्मियों की यह प्रवृति जनता पर भारी पड़ रही है। इस कारण क्षेत्र में बढ़ रही चोरियों से जनता में दहशत है।

इसके अलावा चौकी इंचार्ज को भी बाइक का मासिक भत्ता साढ़े तीन सौ रुपये मिलता है जो कि एक सप्ताह के लिए ही पर्याप्त हो पाता है। उसके बाद महीने के आखिर तक वह अपनी जेब से पेट्रोल भरता रहता है।
अक्टूबर में कुमाऊं दौरे पर डीजीपी सुभाष जोशी ने राज्य पुलिस से भत्तों में बढ़ोतरी का वादा किया गया था। लेकिन आज तक इस पर अमल नहीं हो पाया है।

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