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शादी ऐसी भी क्या जल्दी है

शादी ऐसी भी क्या जल्दी है

तारिका, सुप्रिया, तृप्ति नाम हैं उन लडकियों के, जिन्हें अपने परिवार या पड़ोस के छोटे बहन-भाई या सहेलियों की शादी की खबरें परेशान नहीं करतीं। भारत में शादी की औसत उम्र (18-22 साल) पार करने के बावजूद इन्होंने परिवार और समाज की ओर से पूछे जाने वाले प्रश्नों का जवाब अपने-अपने स्तर पर देना सीख लिया है। खास यह है कि शादी से पहले अपने सपनों के रास्ते तय करने में लगी ऐसी कितनी ही लड़कियां उन छोटे शहरों व पारंपरिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों से ताल्लुक रखती हैं, जहां लड़कियों के करियर और चाहतों के दरवाजे शादी के लिए आने वाले एक सामान्य प्रस्ताव के आगे बंद होने लगते थे और आज भी हो जाते हैं।

शादी से पहले अपना घर बनाना, माता-पिता को आर्थिक सहयोग देना, उच्चशिक्षा हासिल करना, अपनी कार में माता-पिता को कहीं घुमाना, दोस्तों के साथ कहीं घूमने जाना, अपनी पर्सनैलिटी को तवज्जो देना ऐसे ही अनेक छोटे-बड़े सपनों की लंबी लिस्ट है, जिन्हें लड़कियां शादी से पहले पूरा कर लेना चाहती हैं। कुछ की चाहतों ने अभी उड़ान भरनी शुरू ही की है तो कुछेक की छोटी-छोटी सफलताएं उनके सपनों को और बड़ा कर रही हैं। अनुराधा कहती हैं, 21 साल की थी तो लगता था दो-तीन साल बाद जहां माता-पिता शादी तय कर देंगे, वहीं मेरा भविष्य बन जाएगा। पर आगे पढ़ाई करने और दिल्ली में आकर खुद को समझने का मौका मिला तो लगा कि शादी भी कर लूंगी, पर पहले अपने कुछ सपनों को पूरा करना जरूरी है। अपना भविष्य अपनी पसंद के अनुसार बनाने का सपना आंखों में तैरने लगा, जिसकी शुरुआत अभी से जरूरी थी।

कुछ सवाल और उनके जवाब
शादी क्यों नहीं कर रही हो? पीएचडी कर रही तृप्ति से जब यह प्रश्न पूछा तो बिना देर लगाए गंभीरता से बोली, खुद को उस समय के लिए तैयार कर रही हूं। शादी करना बड़ी बात नहीं है, सब करते ही हैं, पर सबसे पहले आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहती हूं। यह सब शादी के बाद भी तो कर सकती हो? हां, पर अनिश्चितता तो बनी ही रहेगी। तृप्ति के अनुसार, मेरा ऐसा सोचना शादी के बाद के जीवन का डर नहीं है,  महज खुद को सेफ साइड पर रखने की कोशिश है। मैं नहीं जानती कि भविष्य में एक पार्टनर के साथ किस तरह के समझौते करने पड़ते हैं। जीवन का वह अध्याय कैसा हो, उसी को समझने की कोशिश कर रही हूं। 24 वर्षीय तारिका के अनुसार, आज जिम्मेदारी कम है, मैं अपने परिवार की मदद कर सकती हूं, शादी के बाद दो परिवारों की जिम्मेदारी साथ होगी। जवाबों का सिलसिला थोड़ा और आगे बढ़ाती हुई सुप्रिया कहती हैं, कमोबेश आज भी पितृसत्तात्मक ढांचा है, यदि आप पहले से आत्मनिर्भर नहीं हैं और खुद को नहीं जानतीं तो शादी के बाद दूसरों के फैसलों पर आपकी निर्भरता बढ़ जाएगी। नौकरी करना और ऐसा परिवार पा लेना, जो आपके पेशे को भी स्वीकार करता हो, आज यह भी बड़ी बात नहीं है, पर मैं मात्र कमाऊ पत्नी या बहू बन कर भी नहीं रहना चाहती। यह बात मेरे लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है कि शादी के बाद मैं अपना जीवन कैसे बिताना चाहूंगी!

क्या शादी की कोई आदर्श उम्र होती है?
इस प्रश्न पर तृप्ति और सुप्रिया साथ खड़ी नजर आईं। कहा, बिलकुल नहीं। तृप्ति कहती हैं, भावनात्मक रूप से बिलकुल नहीं, हां, बायोलॉजिकल कारणों से एक सही उम्र अवश्य मानी जा सकती है। पर सुप्रिया कहती हैं कि विज्ञान और तकनीक ने यहां भी रास्ते खोल दिए हैं। 35 से 45 साल की उम्र में महिलाएं सामान्य तरीके से गर्भधारण कर रही हैं।

कई दबाव होते हैं
सुप्रिया के अनुसार कुछ ही दिनों पहले की बात है, बिहार से मां मेरे पास दिल्ली आयी हुई थीं। भागलपुर में चाचा के बेटे की शादी थी। मैं मां को साथ लेकर गई, पर स्टेशन पर ही छोड़ कर वापस चली आई। शादी में उपस्थित नहीं हुई। कारण कि भाई की उम्र मुझ से कम थी। उस माहौल में अपनी सोच को समझा पाना बहुत मुश्किल होता है। 29 साल की उम्र पार करने पर शादी करने वाली हेमा के अनुसार, उत्तरांचल के एक छोटे से गांव में रहने वाले लोगों के लिए इस उम्र तक लड़की को अविवाहित देखना मुश्किल होता है। सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी भी मानती हैं कि हमारे समाज में शादी एक संस्था है, जिसमें परिवार, रिश्तेदार और दोस्त शामिल होते हैं। ऐसे में शादी के लिए बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न कई बार शुभ चिंता की उपज भी होते हैं तो कई बार सामान्य उत्सुकता भी। कई बार दबाव इतना अधिक होता है कि इच्छा नहीं होने के बावजूद लड़कियां शादी के लिए तैयार हो जाती हैं। हेमा कहती हैं, कई बार लड़की की शादी नहीं करने की इच्छा को अजीब नजरों से देखा जाता है। इसे उसका किसी के साथ अफेयर, स्वच्छंदता या शादी के प्रति विद्रोह मान लिया जाता है।

कैसे करें दबाव का सामना?
बकौल रंजना ‘दबावों को कम करने के लिए जरूरी है कि आपकी प्राथमिकताएं स्पष्ट हों। साथ ही आर्थिक रूप से किसी लड़की की आत्मनिर्भरता और परिवार को उसका सहयोग समय के साथ उसकी स्वीकार्यता को बढ़ा देता है। सुप्रिया कहती हैं, जब दिल्ली आई थी तो रिश्तेदार के यहां रही। आज छोटी बहन को भी अपने पास बुला कर ही पढ़ा रही हूं।’ अंत में एक मुक्त हंसी हंसते हुए बोली, चाचा के बेटे को खासतौर पर उसकी दीदी द्वारा भेजा गया उपहार और हनीमून का टिकट बेहद पसंद आया।

शादी से पहले की जरूरतें
आत्मनिर्भर बनूं, बोझ नहीं।
परिवार के जीवन को कुछ और बेहतर बना सकूं।
कुछ अपने पैसों से खरीदना, भले ही फोन, फ्रिज, होम एप्लायसेंस या कंप्यूटर आदि।
पति के घर से पहले, अपना खुद का एक घर बनाना।
पापा की नहीं, अपनी कार है चलानी।
खुद से प्यार करना, अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना।
परिवार के बिना, अकेले या दोस्तों के साथ कहीं घूमने जाना। विदेश का टूर हो तो और भी अच्छा।
पर्सनैलिटी को विकसित करना।
मिस्टर राइट होना भी जरूरी।

बचपन से टीवी की दुनिया ने आकर्षित किया। मॉडलिंग का कोर्स करने दिल्ली आ पहुंचीं। फिलहाल छोटे-छोटे मॉडलिंग एसाइनमेंट पर काम कर रही हैं। प्रसिद्ध मॉडल बनने का संघर्ष जारी है, पर सपने थोड़ा-सा और आगे खिसक गए हैं। बड़ी बहन होने का फर्ज भी निभाना है। शादी से पहले कुछ पैसा कमा कर परिवार की मदद करना चाहती हैं।-तारिका जायसवाल, गोरखपुर, उम्र 24 साल

ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में जब घर में शादी की बात चलने लगी तो आंखों के सामने आगे पढ़ाई करने और खुद की पहचान बनाने का सपना टूटता-सा नजर आया। मन नहीं माना। माता-पिता को शादी करने से इंकार कर दिया। फिलहाल एक अखबार में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए कर रही हैं। मानती हैं कि शादी की कोई आदर्श उम्र नहीं होती। शादी से पहले एक अपना घर बनाना चाहती हैं।- सुप्रिया प्रसाद, पटना, उम्र 28 साल

बनारस से ग्रेजुएशन करने के बाद एमबीए करने के लिए दिल्ली आ गईं। गुड़गांव की एक मल्टी नेशनल कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट में नौकरी कर रही हैं। 31 साल की उम्र में अरेंज मैरिज की। मानती हैं कि शादी जैसी संस्था में प्रवेश करने से पहले जिंदगी को समझना जरूरी है। जल्दी शादी करने से कहीं बेहतर है, सही व्यक्ति से शादी करना।-अनुराधा भारती, बनारस, उम्र 32

दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं। जानती हैं कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं। पहली प्राथमिकता खुद को आत्मनिर्भर बना कर अपनी पसंद के भविष्य को आकार देना है। मानती हैं,  शादी से पहले खुद की एक पहचान बनाने की चाहत डर नहीं है, खुद को सेफ साइड पर रखने की कोशिश है। हकीकत के चश्मे से दुनिया को देखने का प्रयास है।- तृप्ति पांडेय, दिल्ली, उम्र 27

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