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बचपना अच्छा है

छोटे बच्चे देखकर हमें अपने बचपन की याद आ जाती है कि हम भी एक समय इनके जैसे ही थे। इसके साथ ही हम सोचने लगते हैं कि अगर हम आज भी बच्चे बन जाएं, तो आसानी से हार नहीं मानेंगे। कहने का मतलब यह कि एक मायने में ऐसा ‘बचपना’ करियर के लिए अच्छा है। यहां हम बच्चों की कुछ ऐसी प्रवृत्तियों की सूची दे रहे हैं, जिन्हें अपनाने से करियर संवर सकता है।

- फिर कोशिश करूंगा : बच्चे बार-बार गिरते हैं, लेकिन इससे बेपरवाह रहकर हर बार उठकर फिर दौड़ पड़ते हैं। नाकामी से न डरकर बार-बार कोशिश करने की ये प्रवृत्ति आपके करियर को चमका सकती है।

- सब ठीक होगा : बच्चों के शोज में अक्सर पात्र कठिन परिस्थिति में फंसे होते हैं। वे पूछते हैं, अब क्या करूं? और आखिर में उन्हें कारगर राह मिल ही जाती है, जिसके सहारे वे आगे बढ़ जाते हैं। इस फॉमरूले का फायदा यही है कि पीछे हटने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी कि आत्मविश्वास और भरोसे के साथ ढूंढेंगे, तो राह मिल जाएगी।

- मदद ले लूंगा : बच्चे किसी से मदद लेने में संकोच नहीं करते, और संकट से निकल जने में कामयाब हो जते हैं। करियर में भी किसी की मदद लेने में कोई बुराई नहीं है।
ल्ल डरना नहीं : अच्छा या बुरा, चाहे कुछ भी हो जाए, बच्चे चीजों का उजला पक्ष ही देखते हैं और खुश रहकर नई राह खोज लेते हैं। करियर में भी विकट हालात आने पर ये रास्ता ही काम में आता है।

- सीखने का जज्बा : बच्चे गलती करके भी परेशान नहीं होते और सीखते रहते हैं। क्योंकि वे अपनी हदें जानते हैं। खुद को विकसित करके वे इस समस्या से पार पा लेते हैं। करियर में भी ऐसा किया जा सकता है।

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