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आदेश के पालन को लेकर बना असमंजस, शिक्षकों के नामों की तक की जा रही है पुष्टि

शिक्षकों के  ताबदलों की सूचि जारी कर शासन ने तो अपना पल्ला झड़ लिया लेकिन असली परेशानी निचले स्तर पर हो रही है। आनन फानन में किए गए तबादलों में रिक्त स्थानों की जानकारी  लेने का जिम्मा मंडल व जिला स्तर के अधिकारियों के जिम्मे डाल दिया गया है। हालत यह है तबादले के लिए विधिवत आवेदन नहीं होने से नाम की तक पुष्टि की जा रही है।

शिक्षा विभाग में तबादले हमेशा से विवाद की जद में रहे हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद गत साल भी यह मामला सुर्खियों में रहा था। इस बार विगत की सभी परंपराओं को ताक में रख कर शासन स्तर से ही 830 शिक्षकों की तबादलों का अनुमोदन कर पालन सुनिश्चित करने के लिए मंडल व जिला मुख्यालयों भेज दिए गए हैं। पचास से अधिक पेज के इन छ: तबादले के आदेशों में प्राइमरी से लेकर  प्रवक्ता पद के शिक्षकों की सूचि शामिल है।

अपर शिक्षा निदेशक  व जिला शिक्षा अधिकारियों के पास पहुंची इन सूचियों में फिलहाल वर्गीकरण का काम चल रहा है। प्रत्येक सूचि से प्राथमिक व माध्यमिक की सूचि अलग की जा रही है। तबादले के इन आदेशों में स्कूलों का नाम साफ नहीं होने से रिक्त पदों की जानकारी लेने में भी परेशानी हो रही है। उदाहरण के तौर पर हल्द्वानी क्षेत्र लिखा गया है यही नहीं इसके 20 किमी के अंतर्गत लिख कर भी तबादले किए गए हैं। इस कवायद के पूरे होने पर ही मंडल व जिला स्तर से तबादले के लिखित आदेश जारी होंगे। यदि रिक्त स्थान नहीं मिला तो आदेश का पालन खटाई में भी पड़ सकता है।

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  • Web Title:आदेश के पालन को लेकर बना असमंजस