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महज खानापूर्ति दिख रहा स्वास्थ्य विभाग का अभियान

एनसीआर में नकली दवाओं का व्यापार तेजी से पांव पसार रहा है। यहां पर बड़ी मात्रा में नकली दवाओं का उत्पादन भी किया जा रहा है। दो सप्ताह पूर्व पुलिस ने भारी मात्रा में एक्सपाइरी दवाओं का जखीरा बरामद किया था, मगर ड्रग विभाग की ओर से नकली और एक्सपाइरी दवाओं की पकड़ के लिए जांच अभियान के बावजूद भी अभी तक कोई पकड़ा नहीं गया है। साफ है कि स्वास्थ्य विभाग का अभियान महज खानापूर्ति ही है। नकली दवाओं के व्यापार का खुलासा एसोसिएटेड चैम्बर ऑफ कॉमर्स (एसोचैम) की रिपोर्ट में भी हुआ है।

रिपोर्ट की जानकारी देते हुए निजी एनजीओ की प्रमुख माला भंडारी ने बताया कि नकली दवाओं का व्यापार नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, गुड़गांव, सोनीपथ, बल्लभगढ़, दादरी, हिसार और देश के अन्य हिस्सों में हो रहा है। नकली दवाओं का बाजार प्रति वर्ष 25 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। इतना ही नहीं कुल बाजार का 20 से 25 फीसदी हिस्सा नकली दवाओं ने हथिया रखा है।

विश्व में बिकने वाली दवाओं में हमारे देश का योगदान 75 फीसदी का है। जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय का आंकड़ा इससे काफी कम है। मंत्रालय के अनुसार देश में कुल 5 फीसदी दवाएं ही नकली हैं। देश में दवाओं का संगठित बाजार 32,000 करोड़ रुपए का है, जिसमें 20 फीसदी हिस्सा बाजार पर नकली दवा बनाने वालों ने कब्जा जमा रखा है, इसमें एनसीआर भी शामिल है। 10-15 नकली दवा माफियाओं का जाल एनसीआर के सरकारी अस्पतालों में फैला हुआ है। जो अपने फायदे के लिए मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।

‘‘नोएडा में अगर नकली दवाओं का व्यापार चल रहा है तो स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन इसे साबित करे। अपने मुखबिर एक्सपाइरी व नकली दवाओं के साथ केमिस्ट की दुकान पर भेजें व कम दाम पर इसे बेचने के लिए कहें। केमिस्ट अगर नकली दवाओं के व्यापार में लिप्त होगा तो दवाएं कम दाम पर खरीद लेगा। बयानों को केमिस्ट एसोसिएशन नहीं मानता है।’’
अनूप खन्ना
प्रमुख, जिला कैमिस्ट एसोसिएशन

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  • Web Title:दवा की तो नकली दवाओं का मर्ज और बढ़ा