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संकट गहराया, वसुंधरा का पद छोड़ने से इनकार

संकट गहराया, वसुंधरा का पद छोड़ने से इनकार

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा है कि पार्टी में उन्हें 60 विधायकों का समर्थन हासिल है। राजे ने रविवार को संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पार्टी नेतृत्व की ओर से नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा देने का निर्देश उन्हें नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि मुझे साठ विधायकों का समर्थन प्राप्त है। राजे ने कहा कि विधायकों को यह तय करना चाहिए कि उनका नेता कौन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में हार की जिम्मेदारी उच्च पदों पर बैठे नेताओं की भी होनी चाहिए।

इससे पहले शनिवार को ही भारतीय जनता पार्टी ने साफ कर दिया था कि वसुंधरा को विपक्ष की नेता पद से इस्तीफा देना ही होगा। वसुंधरा को पार्टी हाई कमान ने दिल्ली आने के लिए भी कहा है।

वसुंधरा राजे का समर्थन कर रहे राजस्थान के 45 भाजपा विधायकों के समूह ने शुक्रवार को राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी, ताकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से पूर्व मुख्यमंत्री को हटाने के आला कमान के फैसले के खिलाफ पार्टी अध्यक्ष पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने इन विधायकों से मिलने से इनकार कर दिया और कहा कि मिलने आने से पहले समय लेना आवश्यक है।

भाजपा और आरएसएस के केंद्रीय नेतृत्व ने कुछ दिन पहले राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री से नेता प्रतिपक्ष पद से हटने को कहा था। यह फैसला इसलिए किया गया, क्योंकि वह विधानसभा तथा लोकसभा चुनाव में पार्टी सदस्यों को साथ लेकर चलते हुए अपेक्षित प्रदर्शन करने में नाकाम रही थीं।

भाजपा को 2004 के आम चुनाव में राजस्थान में मिलीं 23 सीटों की तुलना में इस बार महज चार लोकसभा सीटें मिली हैं। बहरहाल, पद से हटने को कहने के पार्टी के फैसले पर वसुंधरा ने अभी कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन भरतपुर के विधायक विजय बंसल की अगुवाई में उनके समर्थक खुलकर आगे आए हैं।

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