class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बीड़ी बनाकर जीवन गुजार रहा है स्वतंत्रता सेनानी

केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों की भलाई के लिए कई घोषणाएं की हैं परंतु बिहार में आज भी एक स्वतंत्रता सेनानी बीड़ी बनाकर जीवन गुजार रहा है।

मुंगेर जिले के बहियारपुर थाना क्षेत्र के गंगा नदी के तट पर बसे गोरघट गांव निवासी गणोश पासवान आज अपने जीवनयापन के लिए बीड़ी बनाने का काम कर रहे हैं। 90 वर्षीय गणोश पासवान की आंखों में आज भी सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की याद ताजा है।

पासवान ने कहा कि भारत को आजाद कराने के लिए उस समय अन्य युवाओं के साथ वह भी इस लड़ाई में कूद पड़े थे। वह इस दौरान मुंगेर जेल में भी रहे। 

उन्होंने कहा कि वर्ष 1944 में जब महात्मा गांधी मुंगेर आए तो उन्होंने गोरघट की प्रसिद्ध लाठी गांधीजी को भेंट की थी। उन्होंने बताया कि वही लाठी महात्मा गांधी ने जीवित रखने तक अपने साथ रखी। उल्लेखनीय है कि गोरघट की लाठी बहुत प्रसिद्ध है।

गणोश पासवान के पास स्वतंत्रता सेनानी होने के सभी प्रमाण पत्र हैं परंतु अभी तक उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला। वह अभी भी स्वतंत्रता सेनानी को मिलने वाले पेंशन की बाट जोह रहे हैं। जीवनयापन के लिए वह बीड़ी बनाने का काम करते हैं। वह प्रतिदिन 500-600 बीड़ी बनाते हैं, इसके एवज में उन्हें बीड़ी के ठेकेदार से 20 से 30 रुपये मिलते हैं।

उन्होंने बताया कि वह पेंशन के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मिले थे। मुख्यमंत्री ने पेंशन आरंभ करने के लिए एक पत्र भी दिया परंतु अब तक उन्हें पेंशन की एक भी किस्त नहीं मिली।

पासवान बताते हैं कि आज भी भारत को सही मायने में स्वतंत्रता नहीं मिली है। पहले अंग्रेज शासन करते थे और अब पूंजीपति शासन करते हैं। देश में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पासवान के तीन पुत्र हैं परंतु उन्हें भी कोई रोजगार नहीं मिला है। वे भी मजदूरी कर अपना तथा अपने परिवार के जीवन की गाड़ी को खींच रहे हैं।

जीवन के अंतिम पड़ाव में पासवान में अब जीने की कोई इच्छा नहीं बची है। एक कोठरी में बैठे अपने जीवन का अंतिम दौर गुजर रहे पासवान कहते हैं कि अब ईश्वर उन्हें ले जाएं,यही अच्छा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बीड़ी बनाकर जीवन गुजार रहा है स्वतंत्रता सेनानी