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गले की हड्डी बना महिला विधेयक

गले की हड्डी बना महिला विधेयक

‘फिर सुनाई दी महिला बिल की गूंज’ पढ़ी। बार-बार इस मुद्दे को उठाकर राजनीतिक दल हम महिलाओं को शर्मसार करते रहते हैं। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत स्थान आरक्षित करने संबंधी विधेयक संसद के इसी सत्र में पेश करने और 100 दिन में उसे पास करवाने की बात महज खानापूरी और महिलाओं के वोट पाने की चाल के अलावा कुछ नहीं है। दरअसल, यह विधेयक राजनैतिक दलों के लिए गले की हड्डी बन गया है। वे इसके पक्ष में नहीं हैं, फिर भी सही बात कहने से डर रहे हैं। यह साधारण बात नहीं है कि आधी आबादी के मुद्दे पर विचार-विमर्श करते हुए एक दशक से ज्यादा बीत गए फिर भी आम सहमति न होने पाए। लगता है इस विधेयक के पीछे की सोच ही दोषपूर्ण है। सावधान पुरुषों! स्वर्गीय इंदिरा गांधी, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, सोनिया, सुषमा, माया, जाया 33 प्रतिशत की उपज नहीं।

निधि, रमेश नगर, नई दिल्ली

सड़क पर भक्ति नहीं

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए इस फैसले की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है। यह निर्णय न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि संविधान की धर्मनिरपेक्ष छवि को और उजागर करता है। अनगिनत चौराहों पर बने ये मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारे सड़क जाम और दुर्घटना के कारण बने हुए हैं। असामाजिक तत्वों का यहां जमावड़ा कई प्रकार के अपराधों को बढ़ावा दे रहा है।

अंकुर वर्मा, गंगा विहार, दिल्ली

क्यों न देखें घूंसेबाजी

आदरणीय मीरा कुमार जी, कृपया सांसदों के हंगामे का लाइव शो बंद मत कीजिए। प्लीज-प्लीज! पूरे भारत की तस्वीर तो लोकसभा में ही आती है। क्या जनता को यह अधिकार नहीं है कि हम अपने प्रतिनिधियों को लोकसभा की कार्यवाही में देख सकें? क्या हमें यह देखने का अधिकार नहीं कि हमारे प्रतिनिधि अगली सीट पर बैठे हैं या पिछली सीट पर बैठे ऊंघ रहे हैं? क्या हमें हक नहीं कि सांसदों की घूंसेबाजी का नजारा हम लाइव देखें?

राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

किसानों को मुआवजा मिले

इस बार पर्याप्त बरसात न होने के कारण किसानों की फसलों पर काफी प्रभाव पड़ा है। किसानों को भविष्य की चिंता सताने लगी है। सरकार को किसानों की इस समस्या का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहियें। सरकार को जल्द से जल्द नुकसान का जायजा लेकर किसानों को मुआवजा राशि जारी करनी चाहिए जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिले।  खासकर छोटे किसानों का जिनका आय का एक मात्र साधन कृषि है।

शिवेंदर सिंह, मोहाली

कहीं कहीं

कहीं बरसा
तो दे गया बाढ़
कहीं सूखा
बिजलियां गिराकर
गई हैं झाड़।

गफूर खान, नानाखेड़ा, उज्जैन

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