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फीस बढ़ोतरी मामले में एक उम्मीद और जगी

फीस बढ़ोतरी मामले में निजी स्कूलों ने टीएमए पाई फाउंडेशन वर्सेज महाराष्ट्र सरकार और कर्नाटक के इस्लामिक एकेडमी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व फैसले का जो हवाला दिया है, उसके अनुरुप उम्मीद है फैसला शासन के पक्ष होगा।


छठे वेतन आयोग की सिफारिश पर निजी स्कूलों ने जो बढ़े फीस का ढांचा तय किया उसे अभिभावकों ने सिरे खारिज कर दिया। मामले को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया और फीस बढ़ोतरी पर रोक लगा दी,लेकिन मामले में निजी स्कूल कोर्ट से स्टे ले आए। स्टे का आधार उन्होंने कर्नाटक के इस्लामिक एकेडमी को रखा था,लेकिन अब इस मामले में स्थानीय परेन्टस एसोसिएशन ने तर्क  दिया है कि कोर्ट में दायर याचिका में निजी स्कूलों ने टीएमआई पाई फाउंडेशन वर्सेज महाराष्ट्र सरकार और कर्नाटक के इस्लामिक एकेडमी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश आर सी लोहाटी ने 12 अगस्त 2005 को जो फैसला सुनाया उसमें इन्हें अल्पसंख्यक करार दिया गया। इस नाते फीस बढ़ोत्तरी आदि संबंधी मामले में इन्हें किसी तरह के निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र बताया गया। लेकिन प्रदेश के निजी स्कूल अल्पसंख्यकों के दायरे में नहीं आते हैं। इससे उम्मीद जगी है कि अब निजी स्कूलों को उनके द्वारा दिए गए उदाहरण से मात मिल सकती है।

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