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सूबे में सूखा पर कई मण्डलों में आरएमओ ही नहीं

महंगाई से लेकर सूखे तक की मार। लेकिन खाद्य महकमे के आधा दर्जन मण्डलों में अफसर ही नहीं है। ऊपर से विभाग में आलम यह कि कोई आला अफसर तो कई-कई जगहों का काम देख रहा है और कुछ काम की बाट जोह रहे हैं।

खाद्य विभाग में सहारनपुर, मेरठ, चित्रकूट, आजमगढ़, देवीपाटन, इलाहाबाद और अलीगढ़ आदि मण्डलों में लंबे समय से आरएमओ (संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी ) का पद खाली है। कहीं आरएमओ का काम डिप्टी आरएमओ से कराया जा रहा है और कहीं दूसरे मण्डल के अधिकारी से। फैजाबाद के आरएमओ सुधाकर मिश्र के पास देवीपाटन मण्डल का भी जिम्मा है। इलाहाबाद मण्डल का जिम्मा वहाँ के डिप्टी आरएमओ  (जिला खाद्य विपणन अधिकारी) के पास है। दूसरी ओर, तीन आरएमओ इस वक्त खाद्य आयुक्त कार्यालय से सम्बद्ध है और फील्ड में तैनाती की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, विभागीय महिमा इतनी अपरम्परार है कि कुछ अफसर कई सौ किलोमीटर दूर तक का काम देख रहे हैं। मसलन- बहराइच के जिला खाद्य विपणन अधिकारी दुर्गेश प्रसाद के पास बगल का जिला श्रावस्ती तो है ही। इसके अलावा महाराजगंज का भी जिम्मा है। श्री प्रसाद विभाग में अकेले ऐसे अफसर नहीं है। खुद विभागीय आला अफसर मानते हैं कि इस सबका सीधा असर विभाग के कामकाज पर पड़ रहा है।

एक अफसर के मुताबिक खाद्य विभाग में यह हाल सिर्फ मण्डलों या जिलों का नहीं है। शासन भी इससे अछूता नहीं है। आमतौर पर इतने बड़े विभाग में तीन से कम विशेष सचिव नहीं होते रहे हैं लेकिन इस समय प्रमुख सचिव के नीचे विभाग में एक विशेष सचिव है। एक अन्य विशेष सचिव हरिशंकर पाण्डे का तबादला हुए करीब डेढ़ माह से अधिक समय हो गया लेकिन उनकी जगह किसी की तैनाती नहीं हुई है।

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