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बिहारः 38 में से 26 जिले सूखाग्रस्त घोषित

मानसून के दौरान कम वर्षा को देखते हुए बिहार सरकार ने प्रदेश के 38 जिलों में 26 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करते हुए इस संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से बिहार को विशेष आर्थिक पैकेज दिए जाने का अनुरोध किया है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की सोमवार को हुई बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में वर्षा की दयनीय स्थिति और खरीफ फसलों की स्थिति के संबंध में जिलाधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट का गहन अध्ययन कर राष्ट्रीय आपदा कानून के तहत प्रदेश सरकार ने राज्य के 38 जिलों में से 26 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने का निर्णय लिया है।

नीतीश ने बताया कि फिलहाल राज्य के कुल 26 जिलों पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, गया, जहानाबाद, अरवल, नवादा, औरंगाबाद, मुंगेर, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, भागलपुर, बांका, सारण, सिवान, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बेगूसराय, मधेपुरा, किशनगंज, कटिहार एवं वैशाली को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि शेष जिलों में स्थिति की निरंतर समीक्षा की जायेगी और आवश्यकतानुसार अन्य जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने के बारे में निर्णय लिया जायेगा। नीतीश ने कहा कि इस वर्ष राज्य में मानसून के दौरान वर्षा काफी कम हुई है, जिसके कारण खरीफ फसल खासतौर से धान की बुआई लक्ष्य से बहुत कम हुयी है, जिसके फलस्वरूप उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना निश्चित है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि जिन क्षेत्रों में बुआई की गयी है, वहां भी अल्प एवं अनियमित वर्षा के कारण उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना निश्चित है।

नीतीश ने बताया कि भारत के मौसम विभाग से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार इस वर्ष एक जून से छह अगस्त तक औसत वर्षा 568.5 मिमी के विरुद्ध मात्र 371.7 मिमी बारिश हुयी है, जो औसतन 42 प्रतिशत कम है। उन्होंने बताया कि अल्प वर्षा के कारण राज्य के भू एवं सतही जलस्रोत कई भागों में सूख रहे हैं एवं जलाशयों तभा भूगर्भ जलस्तर में काफी कमी आयी है।

बिहार में 87,722,41 एकड़ भूमि में धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया था पर औसत से 52 प्रतिशत कम वर्षा के कारण इस वर्ष 38,229,67 एकड़ भूमि में ही धान की रोपनी हो पायी है। इसी प्रकार 3,08,881 एकड़ भूमि में दलहन की बुआई के लक्ष्य के विपरित मात्र 1,41,156 एकड़ भूमि में ही इसकी बुआई हो पायी है तथा तिलहन की बुआई मात्र 14,287 एकड़ भूमि में ही हो पायी है।

नीतीश ने कहा कि प्रदेश में कम वर्षा के कारण कृषि एवं जल संसाधनों के अतिरिक्त सूखे का प्रभाव पशु संसाधन एवं मानव रोजगार पर भी पड़ने की संभावना है। प्रदेश के विपक्षी दलों द्वारा पूरे बिहार को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की मांग पर नीतीश ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल की हुई बैठक के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। उन्होंने बताया कि कुछ अन्य जिलों में स्थिति की समीक्षा किए जाने के बाद उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किए जाने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

बाद में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव गिरीश शंकर ने बताया कि आपदा रूपी सूखे की इस स्थिति से निपटने के लिए मंत्रिमंडल ने सूखाग्रस्त जिलों में सूखाड़ से निपटने के लिए आपदा राहत निधि तथा राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक निधि से दी जाने वाली सहायता के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है।

शंकर ने बताया कि मंत्रिमंडल ने इन जिलों में किसानों से सहकारिता ऋण, राजस्व लगान एवं सेस, विद्युत शुल्क जो सीधे कृषि से संबंधित हो की वसूली वित्तीय वर्ष 2009-10 के लिए स्थगित रहेगी। उन्होंने बताया कि प्रभावित जिलों में फसल को बचाने, वैकल्पिक कृषि कार्य की व्यवस्था करने, रोजगार के साधन उपलब्ध कराने, पशु संसाधनों का सही रख-रखाव करने, स्वास्थ्य सुविधा, पेयजल की व्यवस्था उपलब्ध कराने आदि के लिए आवश्यकतानुसार सहायता कार्य चलाने आदि की व्यवस्था की जायेगी।

शंकर ने बताया कि राज्य के सिंचाई और लघु सिंचाई विभाग को सूखे से प्रभावित जिलों में इन योजनाओं को लागू करने के लिए आकस्मिता निधि योजना बनाने को कहा गया है। उन्हाेंने बताया कि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को सूखाग्रस्त जिलों में पेयजल की उपलब्धता के लिए 4.64 लाख नलकुप और चापाकल लगाने को कहा गया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित राज्य के कई अन्य मंत्री तथा मुख्य सचिव ने भाग लिया।

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