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निगम कैसे करेगा 140 कालोनियों का विकास


नगर निगम सदन में अवैध 140 कालोनियों को पक्का करने का प्रस्ताव पारित होने से लोगों को ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं। इससे वहां की समस्या कम होने वाली नहीं हैं। मूलभूत सुविधा मुहैया करवाने के लिए इन पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। कौड़ी को तरसने वाला निगम इतनी रकम कहां से लाएगा?

यह सवाल खड़ा हो गया है। पास होने के 15 वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रही कालोनियां इसका बेहतर उदाहरण हैं। निगम पहले पुरानी पास कालोनियों के लंबित विकास कार्य करवाएगा या फिर नई कालोनियों में पैसा खर्च करेगा? यह चुनौती अफसरों के लिए बनी रहेगी।

बहरहाल, इन कालोनियों के विकास को लेकर निगम ने खाका खींच लिया है। इनके प्रस्ताव को हरियाणा सरकार की मंजूरी मिली तो इनमें विकास पर चार हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। सीवरेज, पानी की पाइप लाइन जैसी इंटरनल सर्विस पर करीब 24 सौ करोड़ रुपये का खर्चा होगा। सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट एक्सटरनल सर्विस पर 16 सौ करोड़ रुपये खर्च होगा।

उधर, निगम की मौजूदा माली हालत ठीक नहीं। इतना पैसा कहां से आएगा? इसको लेकर अफसरों सांसे की अभी से फूलने लगी हैं। शहर में पानी की किल्लत किसी से छुपी नहीं है। पक्की कालोनियों में किस तरह बूंद-बूंद पानी को लोग तरस रहे हैं। इससे सब वाकिफ हैं। शहर की टूटी सड़कें विकास की दास्तां बयां कर रही हैं। निगमायुक्त सीआर राणा को उम्मीद कि पास होने के बाद कालोनिवासियों से इंटरनल व एक्सटरनल डवल्पमेंट चाजिर्ज वसूलने का आदेश सरकार जारी करेगी।

इससे एकत्रित धन से कालोनियों का विकास संभव होगा। निगमायुक्त ने बताया कि सर्वे वाली 70 कालोनियों के विकास का एक मोटा खाका खींचा गया। जिसमें दो हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अंदाजा है। अब पार्षदों ने 70 कालोनियों के नाम भी लिस्ट में जुड़वा दिए।

अगर इन सभी 140 कालोनियों को मंजूरी मिली तो विकास पर चार हजार करोड़ खर्च होने की उम्मीद है। अलग बात है सरकारी जमीन पर बसी कालोनियों को पास करने की फिलहाल सरकार की कोई नीति नहीं है।

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