class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पब्लिक नहीं, खुद सरकार है करोड़ों की बकाएदार

स्टांप सरेंडर करने के मामले उल्टी गंगा बह रही है। सरकार का बकाया हो तो तहसीलदार-अमीन घर खोद डालेंगे, लेकिन खुद सरकार बकाएदार हो, तो उसका क्या बना-बिगाड़ लेंगे? सरकार व प्रशासन के आगे तो बस खामोशी ओढ़ लेना ही बेहतर है।
अगर अंदाज न हो तो चले आइए एडीएम फाइनेंस के कार्यालय में देख लीजिए, पता लग जाएगा। स्टांप सरेंडर करने वाले 500 से अधिक लोगों का सरकार पर 5 करोड़ से ज्यादा बकाया है। साहूकार की दुकान पर बकाएदारों को आज-कल कहकर टरकाया जाता होगा, लेकिन यहां तो सरकार के दफ्तर में ही यह काम चल रहा है।

दरअसल, संपत्ति खरीदारों को सरकारी खजाने में एकमुश्त रकम जमा करनी होती है, जिसके लिए स्टांप की खरीद करनी होती है। कभी-कभी होता यह है कि ऐन मौके पर संपत्ति खरीद, एग्रीमेंट का फैसला रद हो जाता है या फिर जरूरत से अधिक के स्टांप खरीद लिए जाते हैं। नियम यह है कि एक दफा खरीद लिया गया स्टांप ट्रेजरी या फिर वेंडर के पास वापस नहीं किया जा सकता। इसे एडीएम फाइनेंस के यहां सरेंडर करना होता है। यहां से रिपोर्ट ट्रेजरी ऑफिस जाती है, जहां से वेरीफिकेशन रिपोर्ट आती है। फिर वाउचर आदि की प्रक्रिया शुरू होती है और रिफंड के चेक जारी होते हैं।

इस व्यवस्था के तहत लोग स्टांप सरेंडर तो कर देते हैं, पर फाइनेंस कार्यालय रिफंड दिलाने में कोई दिलचस्पी ही नहीं लेता। कभी कहा जाता है कि बजट का अभाव है, तो कभी किसी और बहाने से लोगों को टरका दिया जाता है। आज-कल करते सालों बीत जाते हैं।

‘हिन्दुस्तान’ ने टटोला तो पता चला कि लगभग 500 लोग स्टांप सरेंडर कर चुके हैं और रिफंड पाने के लिए दौड़ रहे हैं। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसी की दस हजार की राशि बाकी है, तो किसी की 50 हजार की। चौक के रामकुमार की फाइल वर्ष 05 से लटकी है। 17710 रुपए का भुगतान आज तक नहीं हो पाया। ऊषा पाठक ने 4900 रुपए का स्टांप सरेंडर किया, लेकिन भुगतान आज तक नहीं हो पाया। इस तरह के बहुतेरे ऐसे लोग हैं, जो एडीएम फाइनेंस कार्यालय का चक्कर काटते-काटते हार मान चुके हैं।

एक भुक्तभोगी ने बताया कि पूर्ववर्ती अफसर से उन्होंने कम से कम दजर्न बार गुहार लगायी होगी, लेकिन वह कहां सुनने वाले थे? एडीएम फाइनेंस बाबूलाल श्रीवास इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि लोगों का बकाया बढ़ गया है। कुछ दिन पहले चार्ज लेने वाले श्रीवास का कहना है कि उन्होंने इसे गंभीरता से लिया है और व्यवस्था बनायी है कि कम से कम 10 हजार के बकाएदारों को तुरंत रिलीफ दी जाए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:स्टांप मामले में बह रही है उल्टी गंगा