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करियर में बर्नआउट

आमतौर पर करियर में बर्नआउट शब्द का प्रयोग नहीं होता, लेकिन ये सच है कि कुछ लोगों के करियर में कई बार धीरे-धीरे बर्नआउट की स्थिति जरूर आ जाती है। इसके लक्षण हैं मोटिवेशन न होने के चलते काम में रुचि खत्म होना, उमंग खत्म हो जाना और अंत में परफॉर्मेस पर नकारात्मक असर पड़ना। जाहिर है, ऐसे बर्नआउट से शारीरिक और मानसिक सेहत बिगड़ने के साथ-साथ करियर और जाती जिंदगी में भी बेहिसाब नुकसान हो सकता है।

जब काम करना हो भारी

करियर में बर्नआउट दरअसल एक मनोवज्ञानिक स्थिति है, जिसमें काम के प्रति अरुचि और उसे बोझ समझने की प्रवृत्ति का विकास होते जाता है। ऐसे शख्स को ढेर सारा काम करने के बाद भी खुशी, संतोष या राहत की अनुभूति नहीं होती। लगातार मानसिक अवसाद और इमोशनल थकान इसकी मूल वजहें हैं। इन स्थितियों में बर्नआउट होता है-

जिनके काम में लंबे अरसे से एकरसता हो।

आगे बढ़ने के अवसर न मिल रहे हों।

काम का बोझ काफी ज्यादा हो, और बढ़ता ही जा रहा हो।

नई चीजें सीखने और स्किल डेवलपमेंट के मौके न मिल रहे हों।

उबरने के उपाय

बर्नआउट के संकेत मिलने लगें, तो पहले से संभल जाना चाहिए। जैसे कि काम का नाम लेते ही भयंकर थकान अनुभव हो, बेवजह गुस्सा आने लगे, सनक और निगेटिविटी हावी होने लगे, आए दिन सरदर्द, पेट की गड़बड़, अनिद्रा, अवसाद और वजन में घट-बढ़ होना। ऐसे में नौकरी छोड़ने, बॉस से बात करके समाधान की गुजारिश करने, कार्यशैली बदलने, नई चीजें सीखने, छुट्टी लेकर आराम करने से ही बात बन सकती है। वरना मुर्दनी की हालत बनी ही रहेगी।

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