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महिला आतंकी व दो अन्य को फांसी

महिला आतंकी व दो अन्य को फांसी

मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया और झावेरी बाजार में 25 अगस्त 2003 को हुए बम विस्फोटों के मामले में आतंकवाद निरोधक कानून (पोटा)अदालत ने तीनो दोषियों को गुरुवार को फांसी की सजा सुनाई।

विशेष न्यायाधीश एमआर पुराणिक ने हनीफ अंसारी, उसकी पत्नी फहमीदा और अशरफ अंसारी को यह सजा सुनाई। पोटा कानून की धारा 3, 2, 44 और भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 3.7.427 एवं 120 (ब) तथा विस्फोटक पदार्थ कानून की विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें यह सजा सुनाई गई है।

पोटा अदालत ने 27 जुलाई को हनीफ, फहमीदा, अंसारी और सह आरोपी अशरफ को इस कांड में दोषी करार दिया था। बमकांड में 54 लोग मारे गए थे और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। संभवत. यह पहला मामला है जिसमें एक महिला को आतंकवादी गतिविधि में लिप्त होने के लिए फांसी की सजा सुनाई गई है।

विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने अदालत में तीनों दोषियों को फांसी की सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने फहमीदा के प्रति नरमी बरतने का अनुरोध किया था क्योंकि वह एक महिला हैं और पढ़ी लिखी भी नहीं है।

इस प्रकरण में एक अभियुक्त की नाबालिग बेटी को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे मामले के शुरुआती चरण में ही दोषमुक्त किया गया। अन्य दो आरोपियों उस्मान लड्डवाल और हसन बैटरीवाला को पोटा समीक्षा समिकत के क्लीन चिट देने पर आरोपमुक्त किया गया।

सातवां आरोपी इस मामले में वायदा माफ गवाह बन गया था। गेटवे ऑफ इंडिया और झावेरी बाजार में बमकांड मुंबई में दो दिसंबर 2002 को पूर्वी उपनगर घाटकोपर में एक बस में बम धमाके से शुरू हुए आतंक के सिलसिले की परिणित थे। पश्चिमी उपनगर अंधेरी स्थित सीप्ज में भी एक बस में बम मिला था, हालांकि यह समय रहते निरस्त हो गया था। जांच एजंसी ने तीन मामलों को एक साथ जोड़कर जांच की थी क्योंकि कुछ आरोपी इनमें वही थे। घाटकोपर बमकांड में में सभी आरोपी सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए थे।

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