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छोटी कारें, बड़ी सुविधाएं

छोटी कारें, बड़ी सुविधाएं

अशोक रघुनाथ विचारे का नाम आज से कुछ दिन पहले तक शायद ही किसी ने सुना हो, लेकिन आज वे एक जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने कोई विश्व कीर्तिमान अपने नाम नहीं किया है और न ही वे कोई राजनेता हैं। वे एक सीधे-सादे भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं, फिर भी उनका नाम कहीं-न-कहीं इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। दरअसल, अशोक वह खुशकिस्मत इंसान हैं, जिन्हें टाटा की ड्रीम कार ‘नैनो’ की पहली चाबी मिली। एक छोटी कार ने एक आम हिंदुस्तानी को वो ख्याति और पहचान दी जो किसी फिल्मी अभिनेता को हासिल होती है। रतन टाटा से कार की चाबी लेते हुए सैकडमें कैमरे की चकाचौंध में विचारे के चेहरे की खुशी को पढम जा सकता था। चाबी मिली और उसके बाद शुरू हुआ बधाइयों का सिलसिला, जो लगातार कई दिनों तक चलता रहा।

छोटी कारों के प्रति भारतीय जनमानस की मानसिकता को समझने का इससे अच्छा उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता। नि:संदेह बड़ी लग्जरी कारों के बीच भी छोटी कारों का आकर्षण  सदा से लोगों में रहा है, जिसमें अब तो और इजाफा हो गया है।

चाहत छोटी कारों की

भारतीय बाजार में लंबे समय से छोटी कारों की लोकप्रियता बनी रही है। भारत छोटी कारों का एक बडम बाजार है। यहां के मध्यमवर्गीय लोगों की पहली पसंद हमेशा से छोटी कारें ही रही हैं। यही कारण है कि भारतीय सडम्कों पर दौडम्ने वाली 10 में से 7 कारें हैचबैक होती हैं। लोगों की इस मानसिकता को मारुति ने समझा, रतन टाटा ने पहचाना। लोगों की इस रुचि को अन्य कंपनियों ने भी समझा और छोटी मगर, लग्जरी कारों का निर्माण कर बाजार में दस्तक देने लगीं। एक ओर जहां मध्यम आमदनी वाले परिवार को छोटी कारें पसंद आ रही हैं, वहीं उच्च वर्ग में भी दूसरी कार के विकल्प के रूप में ऐसी कारें पसंद की जा रही हैं। युवा वर्ग की दिलचस्पी ऐसी कारों में सबसे ज्यादा है। 

जरूरत है काफी अहम

कार अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बनने लगी है। पूरे परिवार को एक साथ जाना हो तो बाइक या स्कूटर पर जाना तो संभव ही नहीं। ऐसे में कार एक अनिवार्य सी चीज बन जाती है। करोलबाग में ऑटो पार्ट्स का व्यापार करने वाले विजय शर्मा का कहना है, ‘पहले अकेला था तो स्कूटर से काम चल जाता था, लेकिन पहले शादी और फिर बच्चों के बाद कार लेना जरूरी हो गया। तब अपने बजट को देखते हुए मैंने ऑल्टो ले ली। छुट्टी के दिन कहीं बाहर जाना हो तो कार बड़ी काम आती है।’ 

बाजार विस्तार में लगी कंपनियां
रिट्ज, आई10 या पंटो आदि कारें भले ही आकार में छोटी हों, लेकिन जहां तक बात सुरक्षा और सुविधाओं की है तो ये किसी भी लिहाज से कम नहीं हैं। बाजार में मौजूद इन छोटी कारों में भी अब वही सुविधाएं आने लगी हैं जो पहले केवल सेडान जैसी कारों में ही मिला करती थीं। अब एबीएस और एयरबैग जैसे सुरक्षा उपकरण छोटी कारों में भी जरूरी माने जाने लगे हैं। ऑटो जगत के विशेषज्ञ टूटू धवन का कहना है, ‘पहले यह तकनीक महंगी थी। इसलिए इन्हें इन छोटी कारों में दे पाना संभव नहीं था, लेकिन अब यह तकनीक सस्ती हो गई है। इनमें लगने वाला सामान भी अब पहले से कम कीमत पर बाजार में मौजूद है। इसलिए कंपनियां यह सब सुविधाएं देने को तैयार हैं।’ 
टूटू मानते हैं कि यदि बाजार में कोई कार किसी तरह की कोई खास खूबी देती है तो उस सेगमेंट की अन्य कारों के लिए वह सुविधा मुहैया कराना जरूरी बन जाता है। बाजार में प्रतियोगिता का स्तर इतना ज्यादा है कि कोई किसी के लिए जगह खाली करने को तैयार नहीं है। ऐसे में वे न सिर्फ वही सुविधा देते हैं, बल्कि उससे बेहतर सुविधा के साथ अपनी कार को पेश करते हैं।

बाजार में छोटी कारें 
भारतीय सड़कों पर छोटी कारों का आगमन मारुति के साथ हुआ। आम आदमी की खास कार बन कर मारुति आई और बस छा गई। आज भी भारतीय कार बाजार के लगभग 48 फीसदी हिस्से पर मारुति का ही कब्जा है। आज छोटी और हैचबैक कारें भारतीयों की पहली पसंद हैं। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में दौड़ने वाली कुल कारों की संख्या में से लगभग 70 फीसदी कारें इसी सेगमेंट की हैं, जैसे स्विफ्ट, ऑल्टो, स्कोडा फेबिया, हुंदई, इंडिका आदि। कार बाजार के बिक्री के आंकड़ें बताते हैं कि जून, 2009 में भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली 10 कार मॉडल्स में से 8 इसी सेगमेंट की थीं। ऑल्टो इस सूची में सबसे ऊपर थी।

छोटे शहर और गांव भी पीछे नहीं

कारों की खरीद के मामले में अब गांव और छोटे शहर भी पीछे नहीं हैं। मारुति ने अपनी स्कीम ‘घर-घर में मारुति’ के तहत छोटे शहरों और गांवों को अपना टारगेट बनाया है। कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, मारुति की कुल बिक्री का 10 फीसदी हिस्सा गांवों से आता है। 

कार लोन का सहारा

आम लोगों के कार के सपने को हकीकत में बदलने के लिए बैंकों से मिलने वाले लोन से भी काफी मदद मिल रही है। आज कार खरीदना पहले से आसान हो गया है। लगभग सभी बैंकों से आसान किस्तों पर इसके लिए लोन मिल जाता है।

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