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गारंटी और वारंटी

बाजार में किसी उत्पाद को खरीदते समय दुकानदार उपभोक्ता से सामान की गारंटी/वारंटी बताकर लुभाने की कोशिश करते हैं। अकसर दुकानदार गारंटी/वारंटी के बावत ही ग्राहक को ये विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि अगर उनका सामान खराब भी हो गया, तो चिंता की कोई बात नहीं क्योंकि अमुक सामान की इतने समय की गारंटी/वारंटी है। अमूमन उपभोक्ता गारंटी और वारंटी में फर्क नहीं समझ पाते और कंपनी के छलावे में आ जाते हैं। आप किसी छलावे में न आएं इसीलिए गारंटी और वारंटी के बारे में कुछ बुनियादी जानकारी यहां प्रस्तुत है जो आपको जागरूक उपभोक्ता बनाने में मददगार साबित होगी ।

- गारंटी और वारंटी सिर्फ अपने उच्चारण से ही एक जैसे हैं, पर इनमें काफी फ र्क है। गारंटी में जहां किसी वस्तु के खराब होने पर कंपनी द्वारा उसे बदल दिया जता है, वहीं वारंटी में उसकी मरम्मत व कल पुर्जों को बदला जाता है।

- कई बार गारंटी और वारंटी में समय सीमा का भी फर्क होता है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज्यादातर कंपनियां वारंटी में सात, नौ या तेरह साल तक का कवर देती हैं, लेकिन गारंटी में यह समय-सीमा बहुत कम होती है। मसलन एक या दो साल।

- कुछ दुकानदार ग्राहकों को बेवकूफ बनाकर वारंटी पीरियड में भी मरम्मत करने के बदले कुछ रकम वसूलते हैं। ऐसे में हमेशा सावधान रहें।

- आप सामान खरीद पर उसका बिल जरूर लें।

- कोई भी डील या शॉपिंग करें तो उसमें विज्ञापन में कही बातों को पूरी तरह से सच न मान लें।

- अगर डील से संबंधित किसी कांट्रैक्ट पर साइन करने की नौबत आए, तो उसे अच्छी तरह से पढ़ें और प्रत्येक शर्त समझने के बाद ही दस्तखत करें।

- कोई भी सामान खरीदने से पहले इस बारे में विचार जरूर करें कि यदि किसी वजह से आपको प्रोडक्ट लौटाना पड़े तो क्या रिफंड मिलेगा ?

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