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बड़े परदे पर भाई-बहन का प्यार

बड़े परदे पर भाई-बहन का प्यार

भाई-बहन के प्यार पर बॉलीवुड की भी नजर रही है। हालांकि फिल्मों में भाई-बहन बनने वाले कलाकार अक्सर बड़ी भूमिकाओं को तरसते रहे। बहन-भाई के प्यार पर सबसे पुरानी और लोकप्रिय फिल्मों में से एक है 1959 में रिलीज ‘छोटी बहन’। इसका गीत ‘भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ बाद में राखी का स्लोगन बन गया। एलवी प्रसाद की फिल्म ‘छोटी बहन’ में नंदा के भाइयों का किरदार बलराज साहनी, रहमान ने निभाया था। फिल्म में महमूद भी नंदा के  मुंह बोले भाई की भूमिका में थे। इसके बाद 1969 में रिलीज हुई ‘भाई बहन’ में सुनील दत्त और पद्मिनी भाई बहन बने थे। 1971 में आई ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ भी भाई-बहन के प्यार पर आधारित फिल्म थी। बाद में जीनत अमान के साथ नायक बने देवानंद इस फिल्म में उनके बड़े भाई बने थे जो उसे गलत लोगों की संगत से दूर हटाता है। फिल्म के निर्देशक भी देवानंद ही थे। इसका एक गाना अब भी याद किया जाता है, ‘फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है।’ धर्मेद्र की सुपरहिट फिल्म ‘रेशम की डोर’ भी भाई-बहन के स्नेह की बानगी थी। 1974 की इस फिल्म के निर्देशक आत्मा राम थे। हालांकि फिल्म में र्धमेद्र और उनकी बहन के ज्यादा दृश्य नहीं थे लेकिन कई मौकों पर वह अपनी बहन को याद किया करते थे। इसमें वह एक मिल मजदूर बने थे जो साथी मजदूरों की बहनों पर ही अपना प्यार उड़ेला करता है। फिल्म का गाना ‘बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है’, बहुत लोकप्रिय हुआ था। दो और लोकप्रिय गाने भी हैं। ‘अनपढ़’ का लता मंगेश्कर का गाया ‘रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना’ और ‘काजल’ का आशा भोंसले का गाया ‘मेरे भइया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन’। ‘अनपढ़’ में माला सिन्हा और बलराज साहनी भाई बहन बने थे। ‘चंबल की कसम’ का ‘चंदा रे मेरे भइया से कहना, बहना याद करे’ गाना भी अब तक याद किया जाता है। जीतेंद्र और पद्मिनी कोल्हापुरे की एक फिल्म आई थी ‘ऐसा प्यार कहां’। इसमें बहन पर जान छिड़कने वाले भाई की भूमिका में जीतेंद्र थे। फिल्म ‘तपस्या’ में बहन राखी के बलिदान की कहानी थी जो अपने भाई-बहनों को पालने में अपना जीवन लगा देती है। एक अन्य फिल्म ‘रिश्ता कागज का’ में बड़ी बहन बनी नूतन भाई राज बब्बर का लालन-पालन करती है पर भाभी रति अग्निहोत्री के आने के बाद स्थितियां तेजी से बदल जाती हैं।

कुछ साल पहले रिलीज हुई ‘हम साथ साथ हैं’ और ‘डोली सजाके रखना’ में भाई-बहनों के प्यार का सुंदर और उग्र रूप देखने को मिला था। ‘हम साथ साथ हैं’ में मोहनीश बहल, सलमान और सैफ, नीलम के भाई बने थे। जबकि ‘डोली सजाके..’ में नायिका ज्योतिका के भाइयों का लाड और उसके प्रेमी अक्षय खन्ना पर उनका अत्याचार देखने को मिला था। ऐसे ही अत्याचारी भाई की भूमिका महेश मांजरेकर ने ‘रन’ फिल्म में निभाई थी। बहन भूमिका चावला की तरफ आंख उठाकर देख भर लेने वाले के हाथ पैर तुड़वा देते हैं महेश।

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